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वायरल बुखार से बच्चे हो रहे ग्रस्ति, स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट :CM

जिले में वायरल बुखार से बच्चे ग्रस्ति हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में है।

किशनगंज : जिले में वायरल बुखार से बच्चे ग्रस्ति हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में है। सदर अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्था की गयी है।

बेड के साथ दवाओं की उपलब्धता भी है। यह बात सिविल सर्जन श्रीनंद ने कहा। उन्होंने कहा कि वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों की सर्विलांस और निगरानी करना अति आवश्यक है। ऐसे में अगर जिले के किसी भी निजी/सरकारी अस्पताल में वायरल बुखार से पीड़ित बच्चा भर्ती होता है तो इसकी सूचना विभाग को देनी होगी। ताकि उन बच्चों को निगरानी की जा सके।

सिविल सर्जन ने कहा कि तापमान में अंतर होने पर बच्चों की सेहत पर अधिक असर होता है। संक्रामक रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इस मौसम में डायरिया (Diarrhoea) और डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या बच्चों में अधिक होती है। अस्पताल में ही पूरा इलाज उपलब्ध हो रहें हैं।

बच्चों में किसी भी प्रकार के बुखार संबंधी जटिलताओं के लक्षण की पहचान कर उसका ससमय प्रबंधन बच्चों को सुरक्षित रखने में सहायक होता है । इसीलिए सदर अस्पताल में वायरल बुखार से ग्रसित बच्चों के लिए स्पेशल वार्ड बनाया गया है जिसमें 40 बेड पूरी तरह से वातानुकूलित एवं पाइपलाइन ऑक्सीजन युक्त है।

इसके अलावा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी ऐसे बुखार से ग्रसित बच्चों के तत्काल उपचार की व्यवस्था अस्पताल में की गयी है| स्वास्थ्य सुविधा को सुचारू रूप से क्रियान्वयन करने को जिले के सातों प्रखंडों के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया है| पीएचसी में कम से कम 10 बच्चों वाला बेड तथा आवश्यक सुविधा उपलब्ध करने का दिशा निर्देश दिया गया है ।

उन्होंने बताया बच्चा वार्ड का निर्माण चाइल्ड फैंडली डेडिकेटड पेडिएट्रिक वार्ड की तर्ज पर कराया गया है। जिसमें इंटेंसिव केयर यूनिट (Intensive Care Unit) की भी व्यवस्था रहेगी। वेंटिलेटर तथा अन्य आधुनिक तकनीकी सहायता से यहां जिलेवासियों के चहेते का इलाज किया जाएगा।

जिसमें 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों के उपचार को आवश्यक चिकित्सीय सुविधाओं की व्यवस्था की गई। इसके अलावा सदर अस्पताल में एस एन सीयू भी कार्यरत है जहां 0 से 02 माह के नवजात शिशु की गंभीर स्थिति में इलाज किया जाता है।

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