
Kolkata: बीरभूम के बगटुई गांव में 10 लोगों को घरों में आग लगाकर जिंदा जलाने वाली वारदात के मुख्य साजिशकर्ता लालन शेख की एक दिन पहले सीबीआई हिरासत में मौत हो गई। रामपुरहाट के सीबीआई के अस्थाई शिविर के शौचालय में फंदे से लटका उसका शव बरामद किया गया है। केंद्रीय एजेंसी ने दावा किया है कि लालन शेख ने खुदकुशी की है। जबकि शेख के परिजनों ने आरोप लगाया है कि सीबीआई अधिकारियों की प्रताड़ना की वजह से उसकी जान गई है।

बहरहाल उसकी मौत के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है। खास बात यह है कि बगटुई गांव में 10 लोगों के घरों में आगजनी की घटना से पहले तृणमूल नेता भादू शेख की बम मारकर हत्या कर दी गई थी। उसी का बदला लेने के लिए लोगों के घरों में आग लगाई गई थी। आरोप है कि आगजनी करने वाली 70 से 80 लोगों की भीड़ का नेतृत्व किसी और ने नहीं बल्कि खुद लालन शेख ने किया था।

स्थानीय लोग उसकी मौत के बाद उसकी कई कारगुजारियों का खुलासा कर रहे हैं। पता चला है कि वह सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की छत्रछाया में रामपुरहाट का बेताज बादशाह था। स्थानीय तृणमूल नेता और बड़िसाल पंचायत के उपप्रधान भादू शेख के साथ मिलकर वह पूरे क्षेत्र में बालू के अवैध खनन से लेकर सड़कों पर चलने वाले वाहनों से वसूली का पूरा गिरोह चलाता था। 21 मार्च की रात जब भादू शेख पर बमबारी कर उसकी हत्या की गई, उस समय भी लालन वहीं मौजूद था। जब रात के समय हमलावरों के घरों में आगजनी हुई थी तो आरोप है कि भीड़ का नेतृत्व उसी ने किया था।
वारदात के बाद जब दूसरे दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया तब भी वह गांव में ही मौजूद था। हालांकि दूसरे दिन से वह लापता हो गया था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर जब सीबीआई ने जांच शुरू की तो पता चला कि भादू शेख की हत्या और बाद में गांव में आगजनी, दोनों सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की आपसी गुटबाजी का ही नतीजा था। वसूली की राशि पर वर्चस्व के लिए हत्या और जवाबी आगजनी हुई थी। आगजनी का नेतृत्व लालन ने किया था।
उसका दबदबा इतना था कि गांव के लोग उससे बोलने से डरते थे। पूरे क्षेत्र में जिसे जो कुछ भी लालन कहता था उसे वह करना ही पड़ता था। पुलिस उसकी उंगलियों पर नाचती थी। यहां तक कि जब बगटुई गांव में आगजनी होने लगी और पुलिस वहां पहुंचने के लिए तैयार हुई तो लालन ने ही स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी थी और कहा था कि कोई मौके पर नहीं पहुंचेगा।
उसे गत चार दिसंबर को सीबीआई ने झारखंड के पाकुड़ जिले से गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वह केंद्रीय एजेंसी की हिरासत में था। सूत्रों ने बताया है कि सोमवार को भी उसकी चिकित्सकीय जांच हुई थी। वह पूरी तरह से स्वस्थ था। बाद में शौचालय में जाकर उसने गमछे के सहारे खुदकुशी कर ली है। बीरभूम के जिला पुलिस अधीक्षक नगेंद्र त्रिपाठी ने कहा है कि पुलिस इस घटना की जांच करेगी।
हालांकि सीबीआई ने भी अपने स्तर पर विभागीय जांच शुरू कर दी है। शेख की मौत के बाद उसके गांव में एक बार फिर तनाव का माहौल है। हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी का नेता होने के बावजूद उसके परिवार के पक्ष में कोई खड़ा होना नहीं चाहता। इसकी वजह है कि लालन ने जीते जी पूरे इलाके में डर का राज कायम किया था।
सीबीआई के एक सूत्र ने बताया कि वह इलाके का दुर्दांत अपराधी था और हर तरह के आपराधिक वारदात में शामिल था। उसकी मौत के मामले में किसी तरह की लापरवाही भी की गई है या नहीं इसके लिए केंद्रीय एजेंसी ने विभागीय जांच शुरू की है।



