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UP Election: चुनावी सभाओं से दूर कर लिया है डिम्पल ने, अखिलेश पड़ गये हैं अकेले!

समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव की पत्नी और महिला विंग की जिम्मेदारी सम्भाल रहीं डिम्पल यादव इस बार चुनाव प्रचार की सीन से गायब हैं।

Lucknow: समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव की पत्नी और महिला विंग की जिम्मेदारी सम्भाल रहीं डिम्पल यादव इस बार चुनाव प्रचार की सीन से गायब हैं। किसी महिला प्रत्याशी की घोषणा या समाजवादी पार्टी के कार्यालय में भी वे कभी नहीं दिख रहीं। वे सात फरवरी 2017 को प्रयागराज की सभा में अंतिम बार दिखी थीं, जहां कुछ युवाओं ने हुल्लड़ किया था। शायद उसके बाद ही उनका राजनीति से मोह भंग हो गया। उनकी सभाएं न होने से अखिलेश यादव इस चुनाव में बिल्कुल अकेले हो गये हैं।

प्रयागराज की सभा में उन्होंने कहा था, आप चिल्लाते हो, मुझे डर लगता है, कृपया शांत रहे। वरना हमें आपके भैया से शिकायत करनी पड़ेगी। समाजवादी पार्टी के शीर्षस्थ नेताओं की मानें तो उसके बाद ही डिंपल अकेले किसी भी सभा या भीड़ से परहेज करने लगीं। 2019 में भी वह भीड़ से दूरी बरतने लगी थीं।

समाजवादी पार्टी के लोगों की मानें तो पहले भी डिंपल राजनीति में आना नहीं चाहती थीं लेकिन अखिलेश यादव के दबाव के कारण वे आयीं। उनकी सभाओं में अच्छी भीड़ भी होती थी, लेकिन कई जगह हुल्लड़ का भी सामना करना पड़ा, जिससे वे असहज हो गयीं। इसके बाद उन्होंने चुनावी रैलियों से परहेज करना शुरू कर दिया।

डिंपल के विवाह व व्यक्तिगत जीवन को देखें तो वह लखनऊ में पढ़ रही थीं तब उनकी मुलाकात अखिलेश से हुई। दोनों का रिश्ता मुलायम ने जब स्वीकार नहीं किया, तो अमर सिंह आगे आये और मुलायम को मना लिया। 24 नवम्बर 1999 को दोनों की शादी हुई। अमिताभ बच्चन सहित कई दिग्गज उस शादी में जुटे थे।

2012 में जब अखिलेश सीएम बने तो जो कन्नौज सीट छोड़ी, वहीं से डिंपल को उम्मीदवार बनाया। सपा का उस समय समीकरण ऐसा कि वह निर्विरोध जीत गईं और पहली बार सांसद बनीं। डिंपल ने 2009-2019 तक कन्नौज लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। वह सपा की ऐसी स्टार प्रचारक थीं, जिनकी डिमांड अखिलेश से कहीं भी कम न थी। 2017 के हुल्लड़ के बाद वह धीरे-धीरे भीड़ से दूरी बनाती रहीं। 2019 में वह लड़ी, लेकिन पहले जैसे एक्टिव रोल में नहीं थीं। दूसरे मोदी लहर में वह बीजेपी के सुब्रत पाठक से हार गईं।

5 अगस्त 2021 को डिंपल यादव ने आखिरी बार कन्नौज में जनेश्वर जयंती के दिन साइकिल यात्रा को हरी झंडी दिखाई थी। इससे पहले करीब दो साल वह न तो किसी सभा, न प्रेस कांफ्रेंस में गईं और न ही महिलाओं से जुड़े किसी कार्यक्रम में भाग लिया। मानो अघोषित संन्यास ही ले लिया हो।

समाजवादी पार्टी के सूत्रों के अनुसार वे अभी घर से ही चुनाव प्रचार का प्रबंधन संभाल रही हैं। सोशल मीडिया का पूरा प्रभार उनके जिम्मे है। कब क्या जाना है, हर चीज उनसे पूछकर ही किया जाता है। महिला संगठनों के साथ वो लगातार बैठक कर रही है। प्लानिंग-फीडबैक में उनका अहम रोल है।

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