

रांची।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने नए साल के पहले दिन छह राज्यों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट (LHP) की नींव रखी। उन्होंने ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज-इंडिया (GHTC) के तहत अगरतला (त्रिपुरा), रांची (झारखंड), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात) और चेन्नई (तमिलनाडु) में लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी। इसके तहत हर शहर में इस तरह के एक हजार आवासों का निर्माण किया जाना है जिसे एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रांची के धुर्वा में होगा लाइट हाउस का निर्माण

लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत रांची के धुर्वा के आनी गांव में 1108 लाइट हाउस का निर्माण होगा। धुर्वा स्थित पंचमुखी मंदिर के पीछे आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री ने जिस सोच और दूरदर्शिता के साथ आवास निर्माण के क्षेत्र में गति लाने के लिए यह योजना शुरू की है , उसका लाभ शहरों में रहनेवाले गरीबों-मजदूरों और बेघरों को मिलेगा।
लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स में सबसे बेहतरीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स में सबसे बेहतरीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है और इस परियोजना से अर्बन हाउसिंग की जरूरतें पूरी होंगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर हर देशवासी को गर्व होगा कि विकास को गति देने के लिए हाई-एंड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। रांची में जर्मनी के 3डी कंस्ट्रक्शन सिस्ट्म्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह अगरतला में न्यूजीलैंड की स्टील फ्रेम टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है। लखनऊ में कनाडा की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है।

निम्न वर्ग को मिलेंगे फ्लैट
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित लाभुकों को प्रोजेक्ट में लॉटरी से फ्लैट मिलेंगे। एक आवास की लागत करीब 13.29 लाख रुपए होगी। इसमें 5.50 लाख रुपए केंद्र, 1 लाख रुपए राज्य सरकार और 6.79 लाख रुपए लाभुकों को देना होगा। बैंक लोन भी मुहैया कराया जाएगा।
5.50 एकड़ जमीन पर होगा निर्माण
सिंगापुर की तर्ज पर धुर्वा में 1108 लाइट हाउस का निर्माण 5.50 एकड़ जमीन पर होगा। इसके बगल में 2 एकड़ जमीन पर पहले प्री कास्ट कारखाना लगेगा, ताकि लाइट हाउस का निर्माण किया जा सके। जैसे-जैसे फ्लैट बनते जाएंगे, उन्हें चिह्नित जमीन पर ले जाकर एक के बाद एक रखा जाएगा। निर्माण स्थल के पास लगाए जाने वाली फैक्ट्री में फ्लाई एश ईंट बनाई जाएंगी। इसे सीमेंट के साथ माइक्रो सलिकिया आदि केमिकल मिलाकर जोड़ा जाएगा। दीवारें व फर्श बनने के बाद पहले से ढली छड़, सीमेंट, गिट्टी की छत जोड़ दी जाएगी। इसके बाद ट्रॉली के जरिए फ्लैट को निर्माण स्थल पर ले जाकर एक के ऊपर एक क्रेन के जरिए रख दिया जाएगा।
फ्लैट में रहने वालों को ये सुविधाएं
एक फ्लैट का कारपेट एरिया 315 वर्गफीट होगा।
एक बेडरूम, एक हॉल, किचन, बाथरूम सहित बालकनी होंगे।
बिजली-पानी, पार्क, कम्यूनिटी हॉल आदि मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी।
बहुमंजिला होने के कारण लाई स्पीड लिफ्ट और वाहन पार्किंग के लिए भी जगह होगी।
सीएम ने किया लाभुकों को हिस्सेदारी में राहत देने का आग्रह
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि रांची में लाइट हाउस परियोजना के अंतर्गत 1108 आवास बनाए जाने हैं। इस परियोजना में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ लाभुकों को भी हिस्सेदारी देनी है। लेकिन, झारखंड पिछड़ा राज्य है। योजना में जो हिस्सेदारी तय की गई है, उसे देना उनके लिए बहुत आसान नहीं। मुख्यमंत्री ने गरीबों और मजदूरों के आर्थिक हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री से इस योजना में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि उनपर ज्यादा आर्थिक बोझ नहीं पड़ सके।
क्या है यह योजना
लाइट हाउस प्रोजेक्ट केंद्रीय शहरी मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत लोगों को स्थानीय जलवायु और इकोलॉजी का ध्यान रखते हुए टिकाऊ आवास प्रदान किए जाते हैं। लाइट हाउस प्रोजेक्ट के लिए जिन राज्यों को चुना गया है उनमें त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में खास तकनीक का इस्तेमाल कर सस्ते और मजबूत मकान बनाए जाते हैं। इस प्रोजेक्ट में फैक्टरी से ही बीम-कॉलम और पैनल तैयार कर घर बनाने के स्थान पर लाया जाता है, इसका फायदा ये होता है कि निर्माण की अवधि और लागत कम हो जाती है। इसलिए प्रोजेक्ट में खर्च कम आता है। इस प्रोजेक्ट के तहत बने मकान पूरी तरह से भूकंपरोधी होंगे।



