

बेंगलुरु।

भारत में कोरोना वायरस के केस काफ़ी तेज़ी से बढ़ते जा रहे है। रोज़ कोरोना से संक्रमित लोगों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में कोरोना के रिकॉर्ड 69 से ज़्यादा मामले सामने आए है, जबकि 983 मरीजों ने दम तोड़ दिया। कोरोना के कारण पूरा देश ख़ौफ़ में है चुकी ये बीमारी मरीज़ के सम्पर्क में आने फैलती है इस लिए लोग अपने परिजनों जिनकी मौत कोरोना के कारण हुई है उनका अंतिम संस्कार करने से भी डर रहे है। इसी दौरान मसीहे के रूप में एक शख्स सामने आया है जिसका नाम है अब्दुल रज्जाक और वो पेशे से एक चाय वाला है।

कोरोना के इस कठिन समय में रज़्ज़ाक़ कोरोना संक्रमण से मरे लोगों का अंतिम संस्कार करवाने का काम कर रहे हैं। दरअसल एक वीडियो अभी सोशल मीडिया में वायरल हुई थी जिसमे रज़्ज़ाक़ एक बच्ची का शव अपने दोनों हाथों में लेकर अंतिमसंस्कार के लिए ले जाते दिखे थे। जानकारी के मुताबिक बच्ची पश्चिम बंगाल की रहने वाली थी। किडनी में प्रॉब्लम होने की वजह से बच्ची को सेंट जोंस अस्पातल में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि बच्ची कोरोना पॉजिटिव है। उसका इलाज किया जा रहा था, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं पाए। जब परिजनों को उस बच्ची का लाश ले जाने को कहा गया तो वो डर रहे थे। जिसके बाद वॉलंटियर ग्रुप की ओर से रज्जाक को फ़ोन किया गया, फिर वो आकर शव को अंतिम संस्कार के लिए ले कर गए। हालांकि रज्जाक ने बताया कि अंतिम संस्कार के वक़्त उस बच्ची के परीजन भी उसके साथ मौजुद थे।

अब्दुल रज्जाक का ये कदम काफी सरहानीय है और पुरे समाज के लिए वो किसी मिसाल से कम नहीं। रज्जाक कन्नूर के रहने वाले हैं, वो बेंगलुरु के फ़्रेज़र टाउन में चाय की दुकान चलाते हैं।
रज्जाक मर्सी एंगल नाम की एक संस्था से जुड़े हुए हैं। अब्दुल रज्जाक ने बताया कि बीते कई महीनों से लोग इस परेशानी से गुजर रहे हैं। ये काफी मुश्किल वक्त है। उन्हें कोई भी कॉल करता है, तो वो अपनी दुकान बंद करके पहले लोगों की मदद करने के लिए आते हैं। अंतिम संस्कार करते हैं और फिर नहाकर अपने काम पर वापस लौट जाते हैं।
रज्जाक जैसे लोगों को सलाम।



