देवघर।

गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने झामुमो सुप्रीमों शिबू सोरेन के उस बयान पर सवाल उठाया है, जिसमे शिबू सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार मौजूदा स्थानीय नीति में संशोधन करेगी। उन्होंने कहा है कि झारखंड में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनाई जाएगी। जिसपर सांसद निशिकांत ने सवाल उठाया है.

मंगलवार को रांची से दुमका जाने के क्रम में बरवाअड्डा स्थित एक ढाबा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिबू सोरेन ने स्थानीय नीति के मुद्दे पर बयान दिया और कहा कि झारखंड में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनाई जाएगी। हालाँकि, इसके कब से लागू होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार का गठन हो चूका है. पूरा मंत्रिमंडल गठन होने के बाद इस मुद्दे पर हेमंत सरकार विचार करेगी।

अब इस मुद्दे पर सांसद निशिकांत दुबे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट डाल सवाल उठाते हुए कहा है कि झारखंड में 30 प्रतिशत लोग भूमिहीन हैं, जिनके पास ना घर का ना जमीन का खतियान है, अभी पिछले साल ही पौडैयाहाट में सरकार 25 आदिवासी का मकान जो सरकारी ज़मीन पर बना था तोड़ चुकी है, गरीब आदिवासियों की सरकार उनको बंगलादेश या पाकिस्तान भेजने की तैयारी कर रही है?
उन्होंने कहा है कि इस राज्य का बँटवारा 1905 में ईस्ट बंगाल व वेस्ट बंगाल के तौर पर,1912 में वेस्ट बंगाल व बिहार के तौर पर,1936 में बिहार व उड़ीसा के तौर पर व 2000 में बिहार व झारखंड के तौर पर हुआ है,कल मान लिया जाए कि छोटानागपुर व संथालपरगना का बँटवारा होता है तो खुद गुरु जी (शिबू सोरेन)छोटानागपुर राज्य के होंगे या संथालपरगना के?
सांसद ने कहा कि इसी खतियान के चक्कर में भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी जी कुर्सी गँवा चुकें हैं । झारखंड हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में इसे असंवैधानिक घोषित किया है । लेकिन यह तो कॉंग्रेस है इसका संविधान से क्या लेना देना?





