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श्रद्धेय अटल जी की वजह से ही उत्पन्न हुआ भाजपा और राजनीति में आकर्षण : महेश पोद्दार


रांची।

राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है| अपने शोक सन्देश में उन्होंने कहा कि भाजपा और राजनीति में उनका आकर्षण श्रद्धेय अटल जी की वजह से ही उत्पन्न हुआ था| उन्होंने कहा कि देश ने, बल्कि दुनिया ने राजनीति में मर्यादा को सर्वोच्च महत्व देनेवाला एक युगपुरुष खोया है जिसकी भरपाई असंभव है|

स्वर्गीय अटल जी के साथ बिताये गए कुछ अमूल्य लम्हों की चर्चा करते हुए श्री पोद्दार ने कहा कि वर्ष 2004 में रांची में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के दौरान उनके करीब रहने का अवसर मिला था| श्रद्धेय अटल जी हंसमुख और मिलनसार थे, उनके आसपास हमेशा मजमा लगा रहता था| कार्यसमिति के दौरान व्यवस्था का जिम्मा मेरे कन्धों पर था और मैं जैसे ही सामने पड़ता, श्रद्धेय अटल जी पूछते – “क्या खिलाओगे?” 

कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने आये पूज्य अटल जी राजभवन में ठहरे थे और आदरणीय आडवाणी जी अशोका होटल में जो आयोजन स्थल भी था| आडवाणी जी ने आयोजन स्थल के खाने की तारीफ़ कर दी तो श्रद्धेय अटल जी ने राजभवन में खाना लगभग छोड़ ही दिया| सुबह अशोका होटल आकर ही नाश्ता करते और रात का भोजन वहीं करके राजभवन लौटते| खाने का स्वाद तो बहाना था, दरअसल उन्हें जमात में खाना पसंद था| 

उन्होंने ताकीद कर दी थी, उनके लिए अलग से कोई विशिष्ट इंतजाम नहीं होना चाहिए| यहाँ तक कि आयोजन स्थल तक सभी वाहन एक ख़ास सीमा तक ही जा सकते थे, आगे बैरिकेटिंग लगी थी| केवल श्रद्धेय अटल जी के वाहन को सीधे सभास्थल तक जाने दिया जाता था| लेकिन यह इंतजाम भी केवल शुरुआती दिन ही चला| अटल जी ने नाराजगी जताते हुए कह दिया कि जो व्यवस्था सबके लिए है, वो खुद भी उसका पालन करेंगे|

संसद में भी मैंने सदैव उनकी मौजूदगी अनुभव की| लगभग हर मसले पर उनका जिक्र आ जाता था कि इस मसले पर अटल जी क्या करते या फिर अटल जी के मुताबिक़ इस मसले में क्या होना चाहिए| ख़ास बात यह कि ज्यादातर उदाहरण सत्ता पक्ष यानि भाजपा की तरफ से नहीं, विपक्ष की तरफ से आते| ऐसी सर्वस्वीकार्यता दुनिया भर में किसी विरले राजनेता को ही प्राप्त होगी|

आज उनके जाने के बाद एक विराट शून्य का अनुभव कर रहा हूँ|संसदीय राजनीति के आरंभिक चरण में हूं, अटल जी की भौतिक कमी तो सदैव खलेगी लेकिन विचारों, कविताओं, संसदीय और राजनैतिक संभाषणों के तौर पर जो विराट मर्यादित ज्ञान भण्डार जो वे छोड़कर गए हैं, उसे सदैव पाथेय मानकर कर्तव्य पथ पर अग्रसर होने का प्रयास करूंगा| युगपुरुष को, भारतीय राजनीति के दैदीप्यमान सूर्य को, अपने पितातुल्य अभिभावक को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि|

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