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शिवराज भी चले योगी की राह: बुलडोजर से दुष्कर्मियों की संपत्ति ध्वस्त की

Bhopal: उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव के बाद पीले रंग का बुलडोजर अब देश में राजनीति का एक प्रमुख हथियार बन गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने ‘बुलडोजर बाबा’ के टैग के साथ चुनाव जीता, जिसे देखते हुए मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान (Madhya Pradesh CM Shivraj Singh Chouhan) भी इसी रास्ते पर चल पड़े।

यूपी चुनाव के दौरान एक दर्जन से अधिक चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले चौहान ने योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा, “बाबा (आदित्यनाथ) बुलडोजर लेकर आए और माफिया को दफनाया गया।”

योगी आदित्यनाथ ने यूपी में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से ‘बुलडोजर बाबा’ की उपाधि अर्जित की, जिन्होंने उन्हें चुनाव के दौरान उन पर हमला करने के लिए यह उपनाम दिया था। सरकार द्वारा पूर्व में लड़कियों के लिए शुरू की गई कई लाभार्थी योजनाओं के कारण चौहान ‘मामा’ के नाम से लोकप्रिय है। भोपाल के एक भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने शिवराज और बुलडोजर के साथ ‘बुलडोजर मामा’ कहकर संबोधित करते हुए कई होर्डिग/बैनर लगवाए।

मध्य प्रदेश में, चौहान का बुलडोजर अभियान 10 मार्च को यूपी चुनावों के नतीजे आने के ठीक एक हफ्ते बाद शुरू हुआ, जहां योगी आदित्यनाथ भाजपा को सत्ता में वापस लाए। 16 मार्च को, शहडोल जिले में एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था, बाद में 19 मार्च तक, चौहान ने सिवनी, श्योपुर, जौरा, शहडोल और रायसेन में माफिया के साथ-साथ सामूहिक बलात्कार, दंगा और अपहरण के आरोपियों की संपत्तियों को जमींदोज करने के लिए बुलडोजर के उपयोग का आदेश दिया था।

28 मार्च को रीवा के सर्किट हाउस में एक आध्यात्मिक कथाकार ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म किया। घटना के दो दिन बाद, चौहान ने रीवा का दौरा किया और जिला प्रशासन और पुलिस को घटना में शामिल लोगों की संपत्तियों के खिलाफ बुलडोजर का उपयोग करने का निर्देश दिया। चौहान ने 31 मार्च को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रीवा जिला प्रशासन और पुलिस से सवाल किया था, ‘आपके बुलडोजर कहां हैं और कब इस्तेमाल होंगे?’

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद रीवा जिला प्रशासन और पुलिस ने दो सप्ताह तक बुलडोजर चलाकर दुष्कर्म मामले से जुड़े लोगों के कई घरों को ध्वस्त कर दिया। ऑपरेशन के दौरान रीवा के कुख्यात गैंगस्टर संजय त्रिपाठी को भोपाल से गिरफ्तार कर सरकारी जमीन पर बने भवनों को गिरा दिया गया।

इसके बाद 10 अप्रैल को रामनवमी के जुलूस के दौरान राज्य के खरगोन और बड़वानी जिले में सांप्रदायिक हिंसा हुई, जिसके एक दिन बाद चौहान के सोशल मीडिया हैंडल ने जनता को संबोधित करते हुए उनका एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्हें लोगों को चेतावनी देते देखा गया कि यदि वे ‘एक मां या बहन को गलत तरीके से देखोगे, तो मामा (उन्हें) जेल भेज देंगे। उसकी दुकान, या घर कुछ भी नहीं बचेगा।’

इसके बाद, 12 अप्रैल को, चौहान ने राज्य के गृह मंत्रालय के अधिकारियों, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ खरगोन और बड़वानी की स्थिति का जायजा लेने के लिए बैठक की। उसके बाद दंगा प्रभावित क्षेत्रों में एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू हुआ जिसे राज्य के अन्य हिस्सों तक बढ़ा दिया गया।

चौहान के बुलडोजर अभियान को मुसलमानों के घरों को कथित रूप से ध्वस्त करने के लिए विपक्ष की व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया और बुलडोजर ड्राइव को ‘पक्षपातपूर्ण कार्रवाई’ करार दिया।

राज्य सरकार की कार्रवाइयों पर दिग्विजय के सवालों ने भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान मचा दिया। सिंह के खिलाफ राज्य के विभिन्न हिस्सों में करीब दो दर्जन प्राथमिकी दर्ज की गई थी और चौहान की बुलडोजर ड्राइव चलती रही।

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