Deoghar News : निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर करीब 290 लोगों से लगभग एक करोड़ 30 लाख रुपये जमा कराने के बाद रिवार्ड और मूलधन वापस नहीं करने का आरोप लगा है। मामले में मो. सगीर अंसारी ने साइबर थाना देवघर के डीएसपी को लिखित शिकायत देकर कथित गोमाास एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता के पांच डायरेक्टरों और मो. परवेज आलम के खिलाफ जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने निवेश की राशि के उपयोग, भुगतान योजना और मूलधन लौटाने से जुड़े पहलुओं की जांच कराने का आग्रह किया है। शिकायतकर्ता मो. सगीर अंसारी, निवासी चेतनारी, पो.-कुशमाहा, थाना पाथरोल, अनुमंडल मधुपुर ने आवेदन में बताया है कि करीब पांच माह पहले मो. परवेज आलम, निवासी करमाटांड़, जिला जामताड़ा ने उन्हें और उनके परिचित कई लोगों को मधुपुर के राजबाड़ी रोड स्थित राजस्थानी गेस्ट हाउस में बैठक के लिए बुलाया था। बैठक में कथित कंपनी के व्यवसाय और निवेश योजना की जानकारी दी गयी थी।
एक लाख रुपये जमा करने पर 11 माह तक 10 प्रतिशत रिवार्ड का आश्वासन

शिकायत के अनुसार, कंपनी का सीआईएन नंबर U21003WB2024PTC269267 बताया गया था। कंपनी का पंजीकरण 18 मार्च 2024 को आरओसी कोलकाता के तहत होने की जानकारी भी दी गयी थी। बैठक में कंपनी के पांच डायरेक्टर अनिलावा देब, सुकांत दास, मौली देब, मोहम्मद साबिर अंसारी और संदीप बाउरी के बारे में बताया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी के ट्रेडिंग व्यवसाय से जुड़ने के लिए एक लाख रुपये जमा करने पर 11 माह तक 10 प्रतिशत रिवार्ड देने और अवधि पूरी होने पर मूलधन वापस करने का आश्वासन दिया गया था।
इस भरोसे पर उनकी टीम से कुल 120 लोग स्कीम से जुड़े। शिकायत में दावा किया गया है कि कुल 290 जमाकर्ताओं ने अलग-अलग तिथियों में बैंक और यूपीआई के माध्यम से लगभग 1.30 करोड़ रुपये जमा किये।
दो माह से भुगतान बंद होने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि रकम जमा करने के बाद कंपनी की ओर से इन्वेस्टमेंट और पेमेंट स्लिप भेजी गयी थी। कुछ जमाकर्ताओं को एक, दो और तीन माह तक रिवार्ड का भुगतान भी मिला, लेकिन इसके बाद करीब दो माह से भुगतान बंद होने का आरोप है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, रकम जमा करने की तारीख, जमाकर्ताओं के नाम, क्लाइंट आईडी, मोबाइल नंबर, स्कीम, जमा राशि, स्टेटस, डिविडेंड, भुगतान शुरू होने और समाप्त होने की तिथि, रिपेमेंट तथा इंट्रोड्यूसर आईडी और नाम से संबंधित विवरण वाली आठ पन्नों की एक्सेल शीट आवेदन के साथ संलग्न की गयी है।
शिकायत के अनुसार, कंपनी की ओर से भेजी गयी पर्ची में निवेश को बाजार जोखिम के अधीन बताया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैठकों के दौरान इंट्रोड्यूसर और निवेशकों को इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी थी।
29 अगस्त को मधुपुर में हुई थी अंतिम बैठक
शिकायतकर्ता के अनुसार, जमाकर्ताओं और इंट्रोड्यूसरों के साथ आरोपितों की अंतिम बैठक 29 अगस्त 2026 को मधुपुर के होटल कुमार इंटरनेशनल के सभागार में हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि बैठक का आयोजन मो. परवेज आलम ने किया था। इसके बाद शिकायतकर्ता और अन्य इंट्रोड्यूसर 9 अक्टूबर 2026 को कंपनी के कार्यालय और डायरेक्टरों के आवास का पता लगाने कोलकाता पहुंचे।
शिकायत के अनुसार, वहां कंपनी के पांचों डायरेक्टरों के आवास पर ताला लगा मिला। कंपनी के निबंधित कार्यालय में भी ताला बंद था। संबंधित मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन सभी मोबाइल बंद मिले
दस्तावेजों के आधार पर जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने आवेदन में कहा है कि निवेश के नाम पर जमा करायी गयी रकम के वास्तविक कारोबारी उपयोग, भुगतान योजना और मूलधन लौटाने की मंशा की जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन तथ्यों की उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है, उन्हें निश्चित आरोप के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं।
11 अक्टूबर 2026 की तिथि वाले आवेदन में साइबर थाना देवघर के डीएसपी से पूरे मामले की जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गयी है। शिकायतकर्ता ने जमाकर्ताओं की जमा राशि और मुआवजा राशि वापस दिलाने के लिए भी आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है।



