
देवघर: देवघर की पूरी अर्थव्यवस्था बाबा मंदिर पर निर्भर है। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों की रोजी-रोटी बाबा बैद्यनाथ मंदिर की वजह से चलती है। ऐसे में डेढ़ साल से न सिर्फ मंदिर का बंद रहना बल्कि दो-दो श्रावणी मेला का आयोजन नहीं होना। असर पड़ना लाजमी है।

आम श्रद्धालुओं के लिए बाबा बैद्यनाथ का दरबार नहीं खुलने से सबसे ज्यादा नुकसान यहां के वैसे छोटे बड़े व्यापारी और पुरोहित वर्ग झेल रहा है जो सिर्फ मंदिर पर ही आश्रित हैं। मंगलवार को भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके खुदरा विक्रेता दुकानदारों ने धरना प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की है कि उनकी परेशानी को समझा जाए और कोविड-19 पालन करते हुए बाबा का दरबार आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए।

दुकानदारों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि बाबा मंदिर पर राजनीति बंद कर बॉर्डर को खोला जाये, श्रद्धालुओं को बाबा मंदिर आने की इजाजत दी जाये। दुकानदारों ने सरकार से सवाल किया है कि जब पूरा देश अनलॉक प्रक्रिया के तहत खोल दिया गया है तो सिर्फ बाबा मंदिर को बंद क्यों रखा गया है। जबकि जितनी व्यवस्थाएं यहां श्रद्धालुओं को आने से रोकने के लिए की गयी है, उतनी व्यवस्था कोरोना के तमाम नियमों का पालन कराकर श्रद्धालुओं को बाबा का दर्शन-पूजन करने के लिए भी की जा सकती है।
दुकानदारों ने कहा कि आर्थिक तंगी से तंग आकर अब हमारे साथी आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। अगर सरकार मंदिर नहीं खोलेगी तो स्थिति भयावह होने वाली है।


