
गुरुग्राम

कोरोना में घरेलू हिंसा के समाचार तो आपने बहुत पढ़े, सुने होंगे, लेकिन यहां कोरोना के कारण एक दंपत्ति का तलाक होने से बच गया। यह खबर सुकून देने वाली है। पति जब कोरोना संक्रमित हुआ तो पत्नी अपने मायके से बच्चे के साथ पति के पास पहुंची। उसकी सेवा करते हुए वह भी संक्रमित हुई। जीवन की इस जद्दोजहद में पत्नी का दिल पसीजा और उसने तलाक का केस खत्म कर पति के साथ रहने का निर्णय लिया।

रांची में नौकरी करने वाला गुरुग्राम निवासी रमेश (बदला हुआ नाम) की शादी भी रांची के पास एक गांव में हुई थी। उनका 4 साल का एक बच्चा भी है। मन-मुटाव के चलते उसकी पत्नी ने अदालत में तलाक और गुजारा भत्ता का केस दाखिल कर रखा है। उसकी पत्नी वहां से 321 किलोमीटर दूर अपने मायके में ही रह रही है। बीते दिनों युवक की पत्नी को जब पता चला कि उसका पति कोरोना संक्रमित हो गया है तो उसकी अन्तर्रात्मा ने उसे झंकझोर दिया। वह भूल गई कि अदालत में तलाक केस चल रहा है। उस समय उसके जहन में सिर्फ और सिर्फ अपनी मांग के सिंदूर, अपने सुहाग के जीवन की चिंता थी। सब कुछ भूलकर वह अपने 4 साल के बच्चे को लेकर अपने पति के पास पहुंचकर उसकी सेवा में लग गई।
पति की सेवा करते-करते वह खुद भी कोरोना संक्रमित हो गई। पति कोरोना नेगेटिव हुआ तो वह भी जिम्मेदारी के साथ अपनी कोरोना पॉजिटिव पत्नी की सेवा करने लगा। दोनों की यह सच्ची सेवा और प्रार्थना रंग लाई। अब पति-पत्नी दोनों स्वस्थ हैं। उनके एडवोकेट से चर्चा करने के बाद गुरुग्राम में एडवोकेट सुधीर मुद्गिल ने बताया कि तलाक का केस भी खत्म हो गया है। परिवार हंसी-खुशी के साथ रहने लगा है।
सुधीर मुद्गिल का कहना है कि समाज को ऐसी घटनाओं से सीख लेनी चाहिए। जिस कोरोना महामारी में 1 साल से लेकर उम्रदराज तक लोगों की मौत हो रही है, ऐसे समय में हमें आपसी विवाद, द्वेष भुलाकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करनी चाहिए। क्योंकि आज दुनिया ऐसे मुकाम पर है, जहां जिंदा रहना ही कामयाबी है।



