
नई दिल्लीः कोरोना की तीसरी लहर (Third Wave of Corona) में बच्चे बुरी तरह प्रभावित होंगे यह कहना सही नहीं है. क्योंकि सीरोसर्वे में यह बात सामने आयी है कि सभी आयुवर्ग के लोगों में सीरो पॉजिटिविटी एक समान है. बावजूद, इसके सरकार तीसरे वेव से निपटने में कोई कोताही नहीं बरत रही है. ये बातें स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही.
18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में सेरोपोजीटिविटी दर 67% और 59%

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि WHO-AIIMS के सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है कि 18 वर्ष से कम और 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में सेरोपोसिटिविटी लगभग बराबर है. वहीं, 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में सेरोपोसिटिविटी दर 67% और 59% है. अगर, ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो, ग्रामीण इलाकों में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में सेरोपोसिटिविटी दर 56% और 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में 63% है.
वैक्सीनेशन के बाद अस्पताल में भरती होने की संभावना कम

वहीं, वैक्सीनेशन को लेकर नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि वैक्सीनेशन के बाद लोगों को अस्पताल में भरती होने की संभावना 75 से 80 प्रतिशत कम हो जाती है. आक्सीजन सपोर्ट की जरूरत आठ प्रतिशत होती है, जबकि आईसीयू में भरती होने की नौबत मात्र छह प्रतिशत लोगों को होती है.


