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क्या हुआ जब अचानक से बच्चों के सामने आ गए पीएम मोदी

कार्यक्रम की संचालिका ने क्रार्यक्रम के दौरान ही बच्चों को बताया कि एक विशेष अतिथि उनसे बातचीत करना चाहते हैं। उसके बाद स्क्रीन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आ गये।

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के साथ बिना पूर्व सूचना के संवाद किया। प्रधानमंत्री ने परीक्षा रद्द किये जाने के बारे में उनकी प्रतिक्रिया तथा आगे की योजना के बारे में सहज और खुशनुमा माहौल में बातचीत की। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से कोरोना के इस चुनौतीपूर्ण समय में कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए तनाव मुक्त होकर रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रहने की सलाह दी। 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपनी ओर से विद्यार्थियों के साथ संवाद का आयोजन किया था। कार्यक्रम की संचालिका ने क्रार्यक्रम के दौरान ही बच्चों को बताया कि एक विशेष अतिथि उनसे बातचीत करना चाहते हैं। उसके बाद स्क्रीन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आ गये। इससे बच्चों के चेहरों पर आश्चर्य और खुशी की लहर दौड़ गई। बाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह उनके माता-पिता और अभिभावकों से भी बातचीत करना चाहते हैं। 

इस संवाद में मोदी के साथ मंडी (हिमाचल प्रदेश), पंचकूला (हरियाणा), गुवाहाटी (असम), कोयम्बटूर (तमिलनाडु), इंदौर (मध्य प्रदेश) आदि स्थानों से बच्चों ने संवाद किया। मोदी ने परीक्षा के संबंध में लिखी गई अपनी पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का भी उल्लेख किया, जिसे अनेक बच्चों ने पढ़ा था और उसे परीक्षा से पहले होने वाले तनाव के संबंध में उपयोगी बताया। प्रधानमंत्री ने आज छात्रों से कहा, “मैं अचानक आपके साथ शामिल हो गया…आशा है कि मैंने आपको परेशान नहीं किया होगा, आप मजे कर रहे थे… ऐसा लग रहा था कि परीक्षा रद्द होने के कारण आपकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।” 

मोदी ने बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों से भी परीक्षा रद्द करने के फैसले पर उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही। बच्चों और उनके अभिभावकों ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के फैसले से एक तनाव और अनिश्चितता का दौर समाप्त हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को इस फैसले के लिए धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने उनसे यह भी पूछना चाहा कि वह आगे अपना समय कैसे व्यतीत करेंगे। प्रधानमंत्री ने कोरोना काल के कठिन समय का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें रोने-धोने के बजाये साहस और संकल्पशक्ति के साथ कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करना है। हर कठिन समय हमारे लिए एक सीख बनकर आता है। 

मोदी ने एक छात्रा के धैर्य और साहस का भी उल्लेख किया जिसने महामारी के दौरान अपने परिवार के दो सदस्यों को खोया है। मोदी ने कहा कि उस बालिका की आंखों में विश्वास दिखाई देता है। मोदी ने कहा कि कोरोना काल के दौरान हमें जो अनुभव मिला है और हमें जो सीख मिली है वह जीवन के अगले पड़ावों में हमारे लिए बहुत उपयोगी होगी। हमें कुछ नया करने की प्रेरणा देगी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अकसर हमें टीम भावना और सामूहिकता का पाठ पढ़ाया जाता है। कोरोना काल में हमें इस सीख से साक्षात्कार करने और इसका अनुभव करने का सीधा अवसर मिला है। हमने देखा कि संकट की इस घड़ी में कैसे लोगों ने एक-दूसरे का हाथ थामा और सहयोग किया। पूरे देश ने टीम भावना से इस संकट का मुकाबला किया। यह जनसहभागिता और टीम भावना आने वाले दिनों में हम सबका मार्गदर्शन करेगी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के इतिहास में अनेक चुनौतीपूर्ण अवसर आये हैं जिनका मुकाबला देशवासियों ने पूरे आत्मविश्वास और ताकत के साथ किया है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि कोरोना महामारी के रूप में एक सदी का सबसे बड़ा संकट हमारे सामने आया है। पिछली चार-पांच पीढ़ियो के दौरान इतना भयावह संकट पैदा नहीं हुआ था फिर भी देशवासियों का यह विश्वास कायम है कि हम इस संकट से विजयी होकर उभरेंगे। हुर भारतवासी के मुंह से यही आवाज निकल रही है कि हम संकट से विजयी होकर निकलेंगे और नई ऊर्जा के साथ देश को आगे ले जाएंगे। 

मोदी ने बच्चों को सलाह दी कि परीक्षा रद्द होने के बाद अब वह अपने समय के सद्पयोग का जरिया ढूढें। आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर वे अपने क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन की किसी घटना पर लेख लिख सकते हैं। इसी तरह आगामी 5 जून को पर्यावरण दिवस का उल्लेख करते हुए बच्चों से कहा कि वे पर्यावरण सुरक्षा के लिए कोई न कोई काम हाथ में लें। प्रकृति और पृथ्वी को बचाना हम सभी का दायित्व है। मोदी ने बच्चों को 21 जून के योग दिवस की भी याद दिलाई। बच्चों को अपने अभिभावकों के साथ योग करने की सलाह दी। 

मोदी ने ओलंपिक सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों को भारतीय खिलाड़ियों के योगदान और खेल के बारे में उनकी तैयारियों के बारे में सीख हासिल करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने बच्चों से टीकाकरण अभियान में सहयोग देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को परिवार और आसपास के लोगों का पंजीकरण कराने के काम में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ेगी टीकाकरण का काम आगे बढ़ेगा। 

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