

नई दिल्ली।

मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.5 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई है और तकनीकी रूप से यह मंदी की पुष्टि करता है.

कोरोना वायरस संकट के बीच 27 नवंबर यानी शुक्रवार को दूसरी बार जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े आ गए हैं. वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी यानी सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में 7.5 फीसदी रही है. वित्त वर्ष की पहली यानी जून की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 24 फीसदी की भारी गिरावट आ चुकी है.
अगर पहली तिमाही से तुलना करें तो अर्थव्यवस्था को रिकवरी मिली है लेकिन इसके बावजूद निगेटिव ग्रोथ इकोनॉमी के लिए सही संकेत नहीं हैं. लगातार दो तिमाही में निगेटिव ग्रोथ को तकनीकी तौर पर मंदी माना जाता है. कहने का मतलब ये है कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर मंदी को स्वीकार कर लिया है.
आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2020-21 की सितंबर तिमाही में भारतीय इकोनॉमी अनलॉक के चरण से गुजर रही थी. मतलब ये कि सख्त लॉकडाउन के बाद इकोनॉमी को धीरे-धीरे खोला जा रहा था.

जीडीपी के आंकड़े आने से पहले तमाम एजेंसियों ने पाँच से दस फ़ीसद की गिरावट का अनुमान लगाया था. पिछली तिमाही में जीडीपी में लगभग 24 फ़ीसद की भारी गिरावट दर्ज की गई थी. पूरी तरह से लॉकडाउन के बाद जीडीपी का यह आंकड़ा आया था.
मौजूदा तिमाही में उद्योग क्षेत्र में 2.1, खनन क्षेत्र में 9.1 और विनिर्माण के क्षेत्र में 8.6 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि कृषि क्षेत्र और मैन्युफ़ैक्चरिंग के क्षेत्र में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है. कृषि क्षेत्र में जहाँ 3.4 फ़ीसद की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है तो वहीं मैन्युफ़ैक्चरिंग क्षेत्र में 0.6 फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ है.
सरकार ने आंकड़ों पर कहा
चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने आंकड़ों पर कहा कि हमारी इकोनॉमी बेहतर कर रही है. कोरोना से पहले इकोनॉमी ने बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन आपदा की वजह से सुस्ती आई. यही वजह है कि पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में करीब 24 फीसदी पर चला गया था. पहली तिमाही के मुकाबले अच्छी रिकवरी है. उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 0.6 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र में 3.4 फीसदी की वृद्धि आई है.
रिजर्व बैंक का था अनुमान
रिजर्व बैंक ने सितंबर तिमाही में जीडीपी में 8.6 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था. केयर रेटिंग्स ने सितंबर तिमाही में जीडीपी में 9.9 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था. कहने का मतलब ये है कि इस लिहाज से इकोनॉमी ने बेहतर प्रदर्शन किया है. इस बात की उम्मीद की जा रही है कि तीसरी और चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था में मामूली सुधार हो सकता है. आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2019-20 की सितंबर तिमाही में जीडीपी में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने जीडीपी में हुई गिरावट को लेकर कहा है कि मौजूदा आर्थिक हालात कोविड-19 के असर की वजह से है.



