Gayaji : पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए बिहार का गयाजी एक बार फिर पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। एक पखवारे तक चलने वाले पितृपक्ष मेला में फल्गु नदी के तट से लेकर विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंडदान वेदियों पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। पितृपक्ष में पिंडदान की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गयाजी में पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मुक्ति प्राप्त होती है। इसी आस्था के चलते देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।

जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को प्रेतशिला, रामशिला, सीताकुंड, देवघाट, विष्णुपद मंदिर सहित अन्य प्रमुख स्थलों पर कुल 3 लाख 33 हजार श्रद्धालु, पिंडदानी और तीर्थयात्री पहुंचे। इसके साथ ही पितृपक्ष मेला शुरू होने से अब तक गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 28 लाख 43 हजार 200 हो गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने मेला क्षेत्र में सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवासन, परिवहन और अन्य सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं।
प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को 11,067 तीर्थयात्रियों ने मेडिकल सेवाओं का लाभ लिया। मेला शुरू होने से अब तक 90,693 लोग चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर चुके हैं। दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शनिवार को 67 लोगों को व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई, जबकि अब तक 585 लोगों ने इसका लाभ लिया है। मेले में खोया-पाया केंद्र भी लगातार सक्रिय है। शनिवार को 87 बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया। अब तक 623 लोगों को उनके परिवार से मिलाया जा चुका है।
कंट्रोल रूम में शनिवार को 142 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि मेले की शुरुआत से अब तक कुल 1,532 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए गांधी मैदान में बनाए गए टेंट सिटी में शनिवार को 1,863 लोगों ने आवासन किया। अब तक यहां 8,552 श्रद्धालु ठहर चुके हैं। तीर्थयात्रियों को सुविधा देने के लिए गंगाजल के 4,150 पैकेट वितरित किए गए, जबकि अब तक 34,091 पैकेट गंगाजल बांटे जा चुके हैं।
पर्यावरण संरक्षण और पूर्वजों की स्मृति को जोड़ते हुए पितृवाटिका में शनिवार को 45 पौधे लगाए गए। अब तक यहां 391 पौधे लगाए जा चुके हैं। बच्चों और बुजुर्गों को भीड़ में बिछड़ने से बचाने के लिए 1,541 लोगों को रिस्ट बैंड लगाए गए। अब तक 8,050 लोगों को रिस्ट बैंड दिया गया है। मेला क्षेत्र में भाषा संबंधी सहायता के लिए एआई आधारित भाषा अनुवाद सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
शनिवार को 9,395 यात्रियों को इस सुविधा से मदद मिली, जबकि अब तक 74,651 यात्रियों को इसका लाभ मिल चुका है। प्रशासन के ये इंतजाम पितृपक्ष के दौरान गयाजी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुगम और सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। (IANS)



