spot_img
spot_img

फिर कराह उठा बचपन… 8 साल की मासूम से दरिंदगी की ख़ौफ़नाक कहानी, सुनकर सिहर उठेगा आपका कलेजा

19 मार्च 2022 को बिहार के बांका जिले में इतिहास की दरिंदगी और हैवानियत की ऐसी इबारत लिखी गई जिसे, इतिहास के पन्नो में काली तारीख के तौर पर याद किया जाएगा।

Banka (Bihar): 19 मार्च 2022 को बिहार के बांका जिले में इतिहास की दरिंदगी और हैवानियत की ऐसी इबारत लिखी गई जिसे, इतिहास के पन्नो में काली तारीख के तौर पर याद किया जाएगा। जिस दिन पूरा देश होली के जश्न में डूबा था और लोग एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर भाईचारे और परंपरा की मिसाल पेश कर रहे थे ठीक उसी वक्त जिले के चांदन इलाके में चंद वहशी दरिंदे सभ्य समाज के चेहरे पर कालिख पोतने की नीयत से अपने मंसूबों को अंजाम देने में जुटे थे।

होली के दिन ढलते सूरज के साथ ही जो खबर सामने आई उसके बाद हर किसी के रौंगटे खड़े हो गए… जिसने भी दरिंदगी के उस ख़ौफ़नाक मंजर को देखा वह वहीं सन्न रह गया और महज़ 8 साल की उस मासूम के साथ हुई हैवानियत ने सैंकड़ों-हज़ारों की आंखें नम कर दी।

चांदन थाना इलाके की रहने वाली 8 साल की एक मासूम मौत की नींद सो चुकी थी , उसका लहूलुहान शव रेत में दबा दरिंदे मौके से फरार थे। लेकिन, चंद घँटों के भीतर ही खाकी ने धरती के उन हैवानों को ढूंढ निकाला और जब हकीकत बेपर्दा हुई तो, इलाके में रहने वाले तमाम बच्चों के परिजनों समेत खाकी और सरकारी मुलाजिमों तक का कलेजा छलनी हो गया।

दरअसल, होली वाले रोज़ बच्ची अपने घर के बाहर खेलने में मशगूल थी। इसी बीच चार दरिंदों की  वहशी नज़र मासूम पर पड़ी और देखते ही देखते चारों भेड़ियों ने मासूम को बहला-फुसलाकर पहले टोटो रिक्शा में बिठाकर एक सुनसान इलाके में ले गए और फिर, बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दे डाला। इतना ही नहीं, इस बीच बच्ची चीखती रही, चिल्लाती रही लेकिन, हवस की आग में अंधे दरिंदों ने उसकी एक न सुनी और उसकी एक आंख नोचकर मासूम के पूरे शरीर को लहूलुहान कर डाला।

ज़रा सोचिए उस बच्ची ने कितना दर्द बर्दाश्त किया होगा , और जब दर्द हद से बाहर हो गया तब मासूम भी उन दरिंदों की तरफ देखते-देखते हमेशा के लिए शांत हो गई। तब इन वहशियों ने उस मासूम को नाले में दफना ऊपर से बालू डाल दिया।

बांका की पुलिस ने मासूम के चारो गुनहगारों के ख़िलाफ़ कानून की डायरी में उनके किये की मुक्कमल धाराओं के तहत तहरीर कलमबद्ध कर उन्हें सलाखों के पीछे तो पहुंचा दिया है। लेकिन, सूत्र बताते हैं कि, सभ्य समाज के चंद ठेकेदार ऐसे भी हैं जो, माँ-बहन और बेटियों की अस्मत तार-तार करने वालों की मज़ज़्मत करने के बजाये उसकी पर्देदारी में जुटे हैं। हमारी आप तमाम आम रियाय से गुजारिश है आइए ऐसे दरिंदों और उनके पैरोकारों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें ताकि, फिर कोई चांदन की निर्भया न बन सके।

Leave a Reply

Hot Topics

Related Articles

Don`t copy text!