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बिहार की नौ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर

नेपाल और बिहार के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश उत्तर बिहार के लिए आफत बन गई है। प्रदेश की नौ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

पटना: नेपाल और बिहार के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश उत्तर बिहार के लिए आफत बन गई है। प्रदेश की नौ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

कोसी के वीरपुर बैराज पर गुरुवार देर रात 1.67 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। गंडक के वाल्मीकि नगर बैराज पर शुक्रवार सुबह 2.70 लाख क्यूसेक पानी था। प्रदेश की नौ प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कोसी सहरसा, सुपौल, खगड़िया में, गंडक गोपालगंज में, बागमती मुजफ्फरपुर व दरभंगा में तो बूढ़ी गंडक मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और पूर्वी चंपारण में लाल निशान के ऊपर है। कमला-बलान मधुबनी में, अधवारा सीतामढ़ी में, खिरोई दरभंगा में, लखनदेई सीतामढ़ी में, परमान अररिया व पूर्णिया में खतरे के निशान से ऊपर है।

नौ जिलों के 54 प्रखंड बाढ़ प्रभावित

उप मुख्यमंत्री रेणु देवी ने कहा कि पश्चिमी व पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, शिवहर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा और समस्तीपुर जिलों के 54 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जगहों पर कुल 95 सामुदायिक राहत केंद्र चलाए जा रहे हैं। पूर्वी चंपारण में सुबह-शाम लगभग 33,328 लोगों को भोजन कराया जा रहा है। इन इलाकों में एनडीआरएफ की सात और एसडीआरएफ की छह टीम तैनात की गई है।

उन्होंने कहा कि जिले में जल्द राहत केंद्र शुरू करने का निर्देश डीएम को दिया गया है। रेणु देवी ने पश्चिमी चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने कहा जिले में चार सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं। नौ नावों का परिचालन किया जा रहा है। अधिकारियों को राहत शिविरों में भी कोविड टीकाकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।

मोतिहारी में छपरा-बहास मुख्य मार्ग टूटा

मोतिहारी प्रखंड के छपरा-बहास मुख्य पथ के रेलवे गुमटी के पास स्थित पुल बाढ़ के पानी के तेज दबाव के कारण ध्वस्त हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया। कई गांवों का सड़क संपर्क बाधित हो गया है। सीतामढ़ी में चोरौत-सुरसंड-सीतामढ़ी एनएच पर अब भी कई स्थानों के डायवर्जन व लचका पर पानी का बहाव जारी है। बेतिया में मझौलिया के तिरवाह इलाका स्थित सेमरा घाट, सरिसवा, बढ़ईया टोला, गढ़वा, भोगाडी, डूमरी, गुदरा, बैराठपुर, बिन टोली आदि गांवों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

समस्तीपुर में बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर है। नदी के जलस्तर ने मगरदही स्थित रेलवे के पुराने पुल के पिलर को छू लिया है। बीसफुटिया में रहने वालों की घरों की छत तक पानी पहुंच गया है। जलस्तर रोसड़ा में खतरे के निशान से 1.61 मीटर ऊपर है। बागमती भी खतरे के निशान से एक मीटर से ऊपर है।

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