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उत्तराखंड आपदा : अबतक 14 शव हुए बरामद

N7News Admin 08-02-2021 09:16 AM उत्तराखंड




चमोली।

उत्तराखंड के चमोली जिले में ऋषिगंगा आपदा में 170 से अधिक लोगों के लापता होने, दो हीड्रोपॉवर प्रोजेक्ट और कई पुलों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। लापता लोगों में 30 से अधिक कर्मचारी और दो पुलिस कर्मचारी शामिल हैं।

घटना में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उन सभी को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा राज्य सरकार देगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ऋषिगंगा के पांच किमी नीचे तपोवन क्षेत्र में निर्माणाधीन एनटीपीसी परियोजना में मलबे से अवरुद्ध एक सुरंग में 35 से अधिक लोग फंसे हुए थे। तपोवन के धौलीगंगा में बचाव अभियान में 8 शव बरामद हुए हैं। आईटीबीपी और सेना की एक संयुक्त टीम सुरंग के बचाव में लगी हुई है।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक 170 लोग इस आपदा में लापता हैं। '' चमोली पुलिस ने बताया कि टनल में फंसे लोगों के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी है। जेसीबी की मदद से टनल के अंदर पहुंच कर रास्ता खोलने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक कुल 15 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया गया है और अलग-अलग स्थानों से 14 शव बरामद किए गए हैं। '

जानकारों का कहना है कि ऋषिगंगा घाटी में आया सैलाब एक दिन की घटना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना की शुरूआत कम से कम एक दिन पहले हो चुकी थी। ग्लेशियर टूटने की वजह से पहले झील बनी और फिर झील टूटने से ऋषिगंगा में भयानक बाढ़ आयी। जिस जगह ग्लेशियर टूटा वह ऋषिगंगा कैचमेंट एरिया के त्रिशूल और रामणी ग्लेशियर के बीच में स्थित ड्योटी नामक स्थान हो सकता है।

हालांकि ग्लेशियर ज्यादा बड़ा होने की संभावना नहीं है। घटना के बाद रैणी और तपोवन में नदी में पानी का स्तर तीन मीटर से ज्यादा नहीं था, यह कर्णप्रयाग में आते आते डेढ़ मीटर तक रह गया।

ऋषिगंगा कैचमेंट एरिया में हैं 14 ग्लेशियर हैं, जो 52 स्कायर किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं।

उत्तराखंड की नदियों पर जल विद्युत परियोजनाओं का जाल फैला हुआ है। टिहरी सहित 39 परियोजनाओं के साथ ही यूजेवीएनएल की 32 छोटी-बड़ी परियोजनाएं और विभिन्न कंपनियों की परियोजनाएं भी इसमें शामिल हैं। 





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