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आज देशभर में मनाई जा रही लोहड़ी, जानिए इस त्यौहार का महत्व

N7News Admin 13-01-2021 11:32 AM धर्म

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पर्व-त्यौहार


 

नए साल की शुरुआत के बाद आज देशभर में पहला त्यौहार लोहड़ी (Lohadi 2021) मनाया जा रहा है। हर साल मकर संक्रांति से पहले वाले दिन लोहड़ी मनाई जाती है।

लोहड़ी खासतौर पर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला त्यौहार है। वैसे इस त्यौहार की सबसे अधिक धूम पंजाब और हरियाणा में देखने को मिलती है। इस दिन किसान अग्नि को फसल से निकले दाने भेंट करते हैं।

कैसे मनाई जाती है लोहड़ी

लोहड़ी का त्यौहार त्योहार सुबह से शुरू होकर शाम तक चलता है। लोग पूजा के दौरान आग में मूंगफली रेवड़ी, पॉपकॉर्न और गुड़ चढ़ाते हैं। आग में ये चीजें चढ़ाते समय 'आधार आए दिलाथेर जाए' बोला जाता है। इसका मतलब होता है कि घर में सम्मान आए और गरीबी जाए। किसान सूर्य देवता को भी नमन कर धन्यवाद देते हैं। ये भी माना जाता है कि किसान खेतों में आग जलाकर अग्नि देव से खेतों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की प्रार्थना करते हैं।

इसके बाद मूंगफली रेवड़ी, पॉपकॉर्न और गुड़ प्रसाद के रूप में बांटा जाता हैं। लोहड़ी के दिन पकवान के तौर पर मीठे गुड़ के तिल के चावल, सरसों का साग, मक्के की रोटी बनाई जाती है। लोग इस दिन गुड़-गज्जक खाना शुभ मानते हैं। पूजा के बाद लोग भांगड़ा और गिद्दा करते हैं।

लोहड़ी का महत्व

लोहड़ी का भारत में बहुत महत्व है। लोहड़ी एक ऐसे पर्व के रूप में मनाई जाती है जो सर्दियों के जाने और बसंत के आने का संकेत है। लोहड़ी पर लकड़ियों के अलावा उपलों से भी आग लगाना शुभ माना जाता है। लोहड़ी के पावन मौके पर लोग रबी की फसल यानि गेहूं, जौ, चना, मसूर और सरसों की फसलों को आग को समर्पित करते हैं। इस तरीके से देवताओं को चढ़ावा और धन्यवाद दिया जाता है। ये वही समय होता है जब रबी की फसलें कटघर घर आने लगती हैं। आमतौर लोहड़ी का त्योहार सूर्य देव और अग्नि को आभार प्रकट करने, फसल की उन्नति की कामना करने के लिए मनाया जाता है।

लोहड़ी का महत्व एक और वजह से हैं क्योंकि इस दिन सूर्य मकर राशि से गुजर कर उत्तर की ओर रूख करता है। ज्योतिष के मुताबिक, लोहड़ी के बाद से सूर्य उत्तारायण बनाता है जिसे जीवन और सेहत से जोड़कर देखा जाता है।

 क्यों मनाते हैं लोहड़ी

बहुत से लोग लोहड़ी को साल का सबसे छोटा दिन और रात सबसे लंबी के तौर पर मनाते हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, लोहड़ी फसल की कटाई और बुआई के तौर पर मनाई जाती है।  किसान लोहड़ी के दिन को नए साल की आर्थिक शुरुआत के रूप में भी मनाते हैं। 





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