Latest News

अज़रबैजान और आर्मीनिया में भीषण जंग, वजह है ये.......

N7News Admin 06-10-2020 06:42 PM Opinion

File Photo



By: Hasan Jamal zaidi

अज़रबैजान-आर्मीनिया जंग का आज 11वां दिन है । काफी जबरदस्त हमले हो रहे हैं। जैसा कि न्यूज में देख और सुन भी रहे होंगे। अज़रबैजान इसमें भारी पड़ रहा है।‌ उसने 16 के करीब अपने एरिया पर कब्जा भी कर लिया है । 

नीचे एक मैप है इसमें काराबाख का एरिया है ।‌इसमें जहां ग्रीन कलर का एरिया है वहां तक कवर कर लिया है अज़रबैजान ने । रेड कलर पर आर्मीनियान फौज है । ये दो दिन पुरानी फिगर है । मतलब रेड एरिया भी अब तक कब्जा लिया होगा अज़रबैजान फौज ने। 

मैप

ये नागोरनो काराबाख अज़रबैजान में ही है और 30 साल से इसपर विवाद है। UNO ने भी इसे अज़रबैजान का ही हिस्सा माना है। लेकिन इसे वापस दिलाने में उसने कोई एक्शन नहीं लिया। यहां मसीह लोगों की आबादी ज्यादा है और वो आर्मेनिया के साथ रहना पसंद करते हैं।  मतलब एक तरह से समझे तो इसके चारों तरफ एरिया अज़रबैजान का है । और ये बीच में एरिया आर्मेनिया का है काराबाख वाला। खनिज संम्पदा से भी भरपूर है ये एरिया । 

इसे और आसान तरह से समझे तो भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी स्थिति की तरह भी समझ सकते हैं कि बीच में भारत ओर दोनों तरफ जैसे पूर्व पाकिस्तान था। 

आर्मेनिया करीब 31 लाख की आबादी वाला एक लैंडलाक मसीही बाहुल्य कंट्री है। इसकी 45 हजार के करीब एक्टिव फौज है। बाकी रिजर्व में सवा लाख के करीब। हथियार अधिकतर रशियन है । 

अज़रबैजान जिसका मतलब है आग की हिफाज़त करने वाला उसका मुहाफिज देश। पहले ये जेरोथिस्ट पारसी थे। 7वी या आठवीं शताब्दी में यहा इस्लाम आया। लेकिन कुछ कल्चर तो वहीं पुराने भी रहते हैं। जैसे हमारे यहां हैं।‌

दूसरा इसका वैज्ञानिक कारण भी है । यहां नेचुरल गैस के बहुत अधिक भंडार है।  बहुत सी जगह में रिसाव होकर खुद आग जलती रहती है। इसलिए भी इसे आग से जोड़ा गया हो सकता है । स्टेटस में तो सैक्यूलर रिपब्लिक कंट्री है। जैसे भारत है। ये करीब 1 करोड़ से कुछ अधिक जन्संख्या वाला एक शिया मुस्लिम बहुल देश है । खनिज संपदा और दूसरे व्यवसाय भी होने के कारण ये एक बेहद  सुंदर साफ सुथरा ओर उन्नत देश है। 

अज़रबैजान का 95% हिस्सा एशिया में और 5% हिस्सा यूरोप में लगता है। इसलिए इसे यूरेशिया भी कहा जाता है। यूरेशिया " से कुछ याद आया आपको ? आर्यो का मूल स्थान। 

यहां शाहबाज़ शाह कलंदर की मज़ार भी है । दमा दम मस्त कलंदर ..

इसके पास करीब डेढ़ लाख एक्टिव आर्मी है।  दो लाख के करीब रिजर्व फौज है। हथियार अधिकतर रशियन और इजराइल के है । नस्ली एतबार से ये आज़री तुर्क है। इस लिहाज़ से इनकी तुर्की ओर ईरान दोनों से नज़दीकी मामला है। यहां का लाइफ स्टाइल रुस जैसा ही है । डांस बार और शराब बार भी है । टूरिज्म है । बाकू कैपिटल है । मन्नात यहां की करेंसी है । एक मन्नात शायद 20 भारतीय रुपये के करीब होगा । ओपन माहौल है। महिलाएं ईरानी और टर्किश , रशियन मूल जैसी है। पुरुष भी लगभग ऐसे ही है । 

नोरोज़ यहां भी एक बड़ा त्योहार है जो 7 दिन तक मनाया जाता है.डांस ओर दोस्तों की मेहमानदारी चलती है । 7 दिन तक लोग अपने घरों के दरवाजे मेहमानों के लिए खुले रखते हैं ।‌ इतनी बातें जानकर हो सकता है कुछ मुल्ला जी लोगों की दीनी खुमारी कुछ कम हो गयी होगी और अब वो फैक्ट समझेगे। 

आसान और शार्ट में समझे तो मामला कुछ यूं है कि दुनिया जो दो धड़ो में बंटने जा रही थी  या बंट चुकी है । उसमें कुछ पलीता लगाने को ये जंग लगाई गयी है।इसकी टाइमिंग तो यही बता रही हैं ।

 अजरबैजान को इजराइल जैसे देशों का बैकअप मिल रहा है और टर्की तो साथ है ही। तो आज़रबैजान को लगा कि आर्मेनिया से हम अपना मैटर इस माहौल में सुलझा लें तो हमारे लिए बेहतर रहेगा । वो अपने हिसाब से सही सोचे। क्यूकि उन्हें औरों से कोई खास मतलब भी नहीं ।‌

 अब रुस ,चाइना ,ईरान,टर्की,पाकिस्तान,कतर,मलेशिया,नार्थ कोरिया जैसे देश एक ब्लाक में है। तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका,इंग्लैंड,आस्ट्रेलिया,जापान,भारत ,इजराइल , सऊदी अरब जैसे देश दूसरे गुट में है। आर्मेनिया आज़रबैजान जंग मे पहले वाले गुट की कंडीशन आपस में ही गड़बड़ाने लगीं हैं । आर्मेनिया sto का सदस्य है । जैसे नाटो है ,वैसे ही रुस ने sto बनाई हुई है। पहले आज़रबैजान भी इस sto सदस्य था । मतलब अगर आर्मेनिया पर हमला होता है तो sto के सभी सदस्य देश उसकी मदद को आयेंगे। इसमें वहीं देश है जो रुस से अलग हुए हैं ।‌  इसमें टर्की ओपनली आज़रबैजान के साथ है और पाकिस्तान व इजराइल भी । अब जहां इजराइल होगा वहां ईरान किसी हाल साथ खड़ा नहीं होगा। जबकि ईरान के आज़रबैजान से बहुत करीबी संबंध है। आज़री लोग खुद ईरान में 30% के करीब है । यहां तक की ईरान के सुप्रीम और धार्मिक लीडर अली खामनेई साहब भी आज़री है । लेकिन,आर्मेनिया भी उनका पड़ोसी देश है । और आर्मेनिया मूल के लोग भी ईरानी नागरिक हैं । दूसरी तरफ आर्मेनिया ईरान का सामरिक महत्व वाला देश है । प्रतिबंध लगे होने के बावजूद वो आर्मेनिया के रास्ते अपना काम निकालता रहा है । इसलिए ईरान ही वो देश है जो वास्तव में इन दोनों देशों में सीजफायर कराना चाहेगा । बाकी सब अपने अपने हिसाब से है ।‌

भारत की स्थिति भी इसमें अजीब सी है । यहां एक टाइप वर्ग तो आर्मेनिया के साथ ही सहानुभूति रखेगा क्यूकि मुल्ले जो आज़रबैजान की तरफ है । जबकि भारत देश की अपनी पोलिसी होती है । भारत के दो मित्र देश रुस और ईरान उससे दूर हो गये । इसलिए वो चाहेगा के इस ब्लाक में आपस में ही बज जाये । जिससे मेरे वाले मेरी तरफ आ जाए और हर कंट्री इसी तरह सोचता है । 

सऊदी अरब भी आज़रबैजान की ही साइड लेगा । क्योंकि उधर इजराइल है तो वहां ईरान नहीं होगा । हांलांकि वहां टर्की भी है। इसलिए सऊदी वहां कोई खास तरह से साथ नहीं होगा बस ऐसे ही । 

कहा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कोई चीज़ स्थाई नहीं होती।बस मुल्को के अपने हित स्थाई होते हैं । लेकिन कुछ चीजें भी काफी हद तक और काफी समय तक स्थाई रहती है । जैसे रुस अपने टुकड़े हो जाना कभी नहीं भूलेगा। जापान अपने ऊपर अमेरिका द्वारा एटमी हमला कभी नहीं भूल सकता। इजराइल जर्मनी में हुआ जेनोसाइट नहीं भूल सकता ।‌ भारत पाकिस्तान बनना नहीं भूल सकता और पाकिस्तान बांग्लादेश का अलग होना नहीं भूल सकता। 

लेटेस्ट ये है कि रूस ने ट्रकी को बोला है कि हमारे सब्र का ज्यादा इम्तेहान लेना ठीक नहीं होगा। इसलिए थोड़ा हल्का हाथ रखो। काराबाख खाली कराने तक रुस आर्मेनिया की मदद को नहीं आयेगा । क्योंकि ये लीगली आज़रबैजान का एरिया है । लेकिन यहां आर्मेनिया पिट रहा है इसलिए उसने आज़रबैजान के सिविलियन एरिया में मिसाइल दागनी शुरु कर दी है । उसने सोचा होगा कि जवाब में आज़रबैजान भी ऐसा करेगा । तो फिर मेरे ऊपर जब हमला होगा तो रूस और sto को आना पड़ेगा । 

उधर ईरान ने आज़रबैजान ओर आर्मेनिया के बोर्डर पर अपने 200 टैंक और एयर डिफेंस सिस्टम ओर आर्टेलरी का डिप्लायमेट कर दिया है और वार्निग दी है कि इस जंग के दौरान अगर ईरान के साथ कोई गेम खेलने की कोशिश की गयी तो उससे बेहद ख़तरनाक नतीजे होंगे और हम हर तरह से निबटा जानते हैं । इसलिए कोई मुगालते में न रहे । और कोई गलतफहमी में न रहे। 

Disclaimer: ये आलेख मूल रूप से लेखक के फेसबुक वॉल से साभार है. ये लेखक के निजी विचार हैं.

नमन





रिलेटेड पोस्ट