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राफेल फाइटर प्लेन को फ्रांस से भारत लेकर पहुंचे 'रोहित कटारिया' का है झारखण्ड कनेक्शन

N7News Admin 29-07-2020 06:15 PM राज्य



By:Manman pandey

झारखंड।

राफेल ये नाम सुनकर देश के लोगो में खुशी तो दुश्मनों के जहन में केवल और केवल डर बैठ जाता है। राफेल अभी के सबसे अत्याधुनिक फाइटर प्लेन में से एक है। राफेल के भारतीय वायु सेना में शामिल होने से जहां एक ओर सेना का मनोबल कई गुना बढ़ गया है तो देश का हर व्यक्ति इसको लेकर गौरव महसूस कर रहा है।

आज इस अत्याधुनिक फाइटर प्लेन को फ्रांस से पहले दस्ते में झारखंड के कोडरमा जिला के तिलैया सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र अपने वतन लेकर पहुंचे हैं। तिलैया सैनिक स्कूल का छात्र रोहित कटारिया 7000 किलोमीटर दूर फ्रांस से राफेल लेकर सेना का गौरव पूरे शानशौकत से पहुँचे चुके हैं।

रोहित कटारिया झारखंड के सैनिक स्‍कूल , तिलैया से वर्ष 1999 में पासआउट हुए। उनके पिता कर्नल सतबीर तब सैनिक स्कूल के प्राचार्य थे। आज कोडरमा स्थित सैनिक स्कूल तिलैया के प्रशासी अधिकारियों, शिक्षकों, छात्रों और पूर्व छात्रों में हर्ष का माहौल है। यहां के पूर्व छात्र रोहित कटारिया देश के उन चुनिंदा पायलटों में एक हैं जो फ्रांस से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल लेकर भारत आये हैं। 

सैनिक स्कूल के कैडेटों का सपना भारतीय सेना का अधिकारी बनने का होता है। कैडेट्स को इसी के लिए तैयार भी किया जाता है। रोहित की उपलब्धि ने इन कैडेटों को रोमांचित कर दिया है और उनके सपनों को भी पंख लगने लगे हैं। सोशल मीडिया पर यहां के छात्रों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे गौरव का पल बताया है। निश्चित रूप से यह स्कूल के लिए गौरव की बात है कि यहां का छात्र उस पहले दस्ते में शामिल है जिसे सबसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को उड़ाने का जिम्मा सौंपा गया।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सैनिक स्कूल तिलैया के शिक्षक धनंजय कुमार ने कहा कि रोहित शुरू से ही मेधावी छात्र था। आज उसने अपने स्कूल का नाम रौशन किया है। धनंजय स्कूल में भौतिकी के शिक्षक हैं। रोहित सैनिक स्कूल तिलैया से सन 1999 में पासआउट हुए थे। इनके पिता कर्नल सतबीर कटारिया तब सैनिक स्कूल तिलैया में ही प्राचार्य के पद पर थे। रोहित का परिवार मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है।


नमन





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