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डरने का समय है, बचपना छोड़िए.... झारखण्ड में कोरोना महामारी ले रहा है विकराल रूप

N7News Admin 24-07-2020 06:03 PM Opinion

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Nitin piryadarshi By: डॉ. नीतीश प्रियदर्शी

रांची।

ये साल काफी ख़राब है मानव सभ्यता के लिए। अगर विश्व के विभिन देशों के रिपोर्ट को अगर देखें तो कोविड-19 (कोरोना) बहुत खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट में विश्व स्वस्थ संगठन का भी रिपोर्ट शामिल है।

झारखण्ड में जहाँ दो महीने पहले दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम रिपोर्ट आ रहे थे आज ये संख्या गुणात्मक तरीके से बढ़ रही है। मरने वालों की संख्या भी। अब रोज 200 से अधिक कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं और इसका सबसे बड़ा कारण असावधानी, बचपना और इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लेना। क्योंकि अभी भी इस बीमारी के बारे में कोई सही जानकारी नहीं मिल रही है और न ही कोई दवा है। अगर आप घर से बाहर निकल रहे हैं तो हमेशा मास्क लगा के रखिये। लेकिन मास्क से ज्यादा जरुरी है कि जितना हो सके घर में रहिये। अगर आप इस बीमारी के चपेट में आने से बच गए तो जीवन में आनंद के कई पल आएंगे। अभी पार्टी करने और पब्लिक प्लेस में आनंद लेने से बचिए।

आपको पुलिस से नहीं अपने मौत से डरने की जरुरत है। मौत आ गई तो फिर आपको लेके ही जाएगी। अगर आप गलती से भी कोरोना पॉजिटिव निकले तो उसके बाद की जो परेशानी होगी वो मृत्यु तुल्य कष्ट से कम नहीं होगी। पैसा जो खर्च होगा सो होगा समाज भी आपको दूर कर देगा।  सरकार ने मास्क नहीं लगाने वालों के लिए सख्त सजा का नियम बनाया है। अगर आप चोरी छुपे मास्क नहीं लगाते हैं तो प्रशासन से तो बच जाइएगा लेकिन मौत से नहीं।

 इस बीमारी से मौत भी कष्टकारक है। अगर आप बच भी जा रहे हैं तो इस बीमारी का साइड इफेक्ट्स बहुत महीनो तक रह सकता है। प्रशासन से अनुरोध है की स्कूल पर विशेष कड़ाई करे क्योंकि अब भी कई स्कूल किसी न किसी बहाने शिक्षकों को स्कूल बुला रहे हैं। जैसा कि संक्रमण के साथ आम है, एक व्यक्ति द्वारा पहले संक्रमित होने और उसके लक्षणों को विकसित करने के समय के बीच देरी होती है। इसे ऊष्मायन अवधि कहा जाता है। COVID-19 के लिए सामान्य ऊष्मायन अवधि पांच या छह दिन है, लेकिन यह एक से चौदह दिन हो सकता है और लगभग दस प्रतिशत मामलों में अधिक समय लगता है।

 देखा जा रहा है की लोग पुलिस के डर से मास्क लगा के निकल रहे हैं.लेकिन बाजार या कहीं पब्लिक जगह पे मास्क उतार दे रहे हैं। यहाँ-वहां थूक भी रहे हैं। आपके घर में रोजाना बाहर से जो काम करने वाले लोग आ रहे हैं उनसे भी दुरी बनाइये। अगर आपका कोई शौक है तो उस पे काम कीजिये। अवसाद से बचिए। अगर आपके पास खुली जगह है तो खुल के सांस लीजिये और शरीर का ऑक्सीजन लेवल बढ़ाइए। अब समय आ गया है कि सरकार या प्रशासन को कोसने के बजाय अपने से नियमो का सख्त पालन करें।

लेखक-डॉ. नीतीश प्रियदर्शी ,पर्यावरणविद एवं  असिस्टेंट प्रोफेसर भूगर्भ विज्ञान विभाग, रांची विश्वविद्यालय। ये लेखक के निजी विचार हैं। 

नमन





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