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जिनके पास खाने को नहीं थे पैसे, उनसे रेलवे ने वसूल लिया किराया

मजदूरों से रेलवे ने लिया किराया/

केरला से जसीडीह के बीच स्पेशल ट्रेन में 1100 से ज्यादा मज़दूर पहुंचे/


BY: Jitendra Kumar Singh 

जसीडीह। 

सरकार के तमाम दावों के बाद भी मजदूरों को अपने घर पहुंचने के लिए ट्रेन का किराया भरना पड़ा। केरला से जसीडीह तक 875 रूपये के टिकट लेकर मजदूर जसीडीह पहुंचे। 

ट्रेन से जसीडीह पहुंचने वाले ज्यादातर मजदूर संथाल परगना के विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं. मजदूरों की आर्थिक स्थिति दयनीय है. उनके पास खाने को पैसे नहीं थे, फिर भी रेलवे ने उन्हें घर तक पहुंचाने के लिए किराया वसूल लिया। जबकि झारखंड सरकार यह दावा कर रही है कि मजदूरों को सरकार ला रही है अपने खर्चे पर, लेकिन असलियत उस समय खुली जब दोपहर 3:00 बजे ट्रेन जसीडीह स्टेशन पहुंची और ट्रेन से निकले मजदूर जो अपने घर के लिए प्रस्थान कर रहे थे उसी समय मीडिया से बात करते समय उन्होंने टिकट दिखाया और कहा कि आज 875 रूपये का एक आदमी को टिकट की कीमत चुकानी पड़ी है।

मज़दूर

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बार-बार केंद्र से आग्रह कर रहे हैं कि मजदूरों को झारखंड लाने में मदद करें। लेकिन केंद्र सरकार ने सहयोग नहीं किया और रेलवे ने मजदूरों से पैसा ले लिया। 

जबकि मजदूरों की स्थिति इतनी दयनीय है कि वह अपने घर तो पहुंच गए हैं लेकिन अपने घर चलाने के लिए उनके पास पैसे नहीं है। केरला में एक महीने से रहकर एक टाइम ही खाना नसीब हो रहा था, वह भी माड़-भात खा के किसी तरह गुजारा कर रहे थे। अगर उन्हें घर नहीं पहुंचाया जाता तो लोगों के सामने भुखमरी वाली नौबत आ गई थी। मजदूरों ने झारखंड व केंद्र सरकार के सारे दावों की पोल खोल कर रख दी।

वहीं, Covid-19 के झारखण्ड के रेलवे के नोडल अधिकारी नीरज अंबष्ठ से इस मामले पर जानकारी लेने की कोशिश की गयी तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। 

रेलवे ने मजदूरों से भी कमाने का मौका नहीं छोड़ा। जबकि मजदूर एक महीने से बिना नौकरी के केरल में फंसे थे. उनकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है. परिवार भी चलाने में सक्षम नहीं है. उन्हें जहां सरकार से सहयोग की उम्मीद थी, वहीं सरकार ने अपने घर पहुंचाने के नाम पर वसूली कर लिया।

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