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सूर्य के राशि बदलते ही मांगलिक कार्यों पर रोक, नए पंचांग वर्ष में 53 दिन बजेगी शहनाई

सूर्य के मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश करने के साथ ही शुक्रवार से शादी-विवाह-मुंडन-उपनयन समेत सभी मांगलिक कार्य पर ब्रेक लग गया। अब 15 नवम्बर को देवोत्थान एकादशी के बाद शुभ लग्न की शुरुआत होगी। सावन से शुरू हो रहे नए पंचांग वर्ष में इस वर्ष विवाह के 53 शुभ मुहूर्त हैं।

बेगूसराय: सूर्य के मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश करने के साथ ही शुक्रवार से शादी-विवाह-मुंडन-उपनयन समेत सभी मांगलिक कार्य पर ब्रेक लग गया। अब 15 नवम्बर को देवोत्थान एकादशी के बाद शुभ लग्न की शुरुआत होगी। सावन से शुरू हो रहे नए पंचांग वर्ष में इस वर्ष विवाह के 53 शुभ मुहूर्त हैं। ज्योतिष अनुसंधान केंद्र गढ़पुरा के संस्थापक पंडित आशुतोष झा ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष में देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी के दिन भगवान विष्णु शयन में चले जाते हैं तथा अगले दिन से चतुर्मास की शुरुआत हो जाती है। जिसके कारण विवाह समेत कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है। सावन, भादो, आश्विन और कार्तिक में भगवान विष्णु शयन में रहते हैं और देवोत्थान एकादशी के दिन जगते हैं, उसके बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू होते हैं।

उन्होंने बताया कि संक्रांति के हिसाब से आषाढ़ का मासान्त 16 जुलाई से हो गया, 17 जुलाई को संक्रांति के दिन आषाढ़-सावन दोनों माह का संक्रमण होगा, इसके बाद 18 जुलाई से सौर कर्म के हिसाब से सावन शुरू हो जाएगा। आज 16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश कर गए, तिथि चंद्रमा के हिसाब से चलता है, जिसके कारण कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होंगे। अब 15 नवम्बर को देवोत्थान (हरिप्रबोधिनी) एकादशी के दिन भगवान विष्णु शयन से जगेंगे। 16 नवम्बर को सूर्य तुला राशि से वृश्चिक राशि में आएंगे, इसके बाद 21 नवम्बर से विवाह समेत सभी मांगलिक कार्य की शुरुआत हो जाएगी। आशुतोष झा ने बताया कि विवाह जैसे अति शुभ कार्य में पंचांग का कई बड़ा महत्व है। सावन, भादो, आश्विन, कार्तिक, पौष और चैत माह को खरमास भी कहा जाता है, जिसके कारण शादी नहीं होती है। शादी के लिए अगहन, माघ, फागुन, वैशाख, जेठ और आषाढ़ माह शुभ होता है। तिथि निर्धारण में रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ होता है, तिथि चौठ, चतुर्दशी और नवमी नहीं होनी चाहिए। शादी अश्विनी, रोहिणी, मृृृगशिरा, मघा, तीनों उत्तरा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवणा, घनिष्ठा और रेवती नक्षत्र में शुभ माना गया है। सबसे अधिक महत्व कुंडली में शुभ ग्रह का होता है। कुंडली में एक, चार, पांच, सात, नौ एवं दसवेेंं स्थान में गुरु एवं शुक्र जैसे शुभ ग्रह रहने पर ही शादी विवाह होते हैं। उन्होंने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार नए पंचांग वर्ष में 53 दिन विवाह का शुभ लग्न हैै। इसकी शुरुआत 21 नवम्बर से होगी।

नवम्बर में 21, 22 एवं 29 को विवाह का शुभ मुहूर्त हैै। इसी तरह दिसम्बर में एक, दो, पांच,छह,आठ,नौ एवं 13, जनवरी में 23 24 एवं 27 फरवरी में दो,छह,सात,दस एवं 11, अप्रैल में 17, 20, 21, 22, 24, 25, 27 एवं 28, मई में दो, नौ, 11, 12, 13, 18, 20, 22, 25, 26, 27 एवं 30, जून में एक, पांच, छह, नौ, 10, 13, 19, 22, 23, 24 एवं तथ 26 जुलाई में तीन, चार, छह एवं आठ को विवाह का शुुुुभ मुुुहूर्त है। 

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