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प्रदेश की राजनीति में दखल देने वाले दो परिवारों की प्रतिष्ठा साबित होगा बेरमो और दुमका उपचुनाव

By: अमर्त्य एम

रांची।

प्रदेश की दो विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में न केवल प्रदेश में सत्तारूढ़ महागठबंधन और विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है बल्कि यह उपचुनाव प्रदेश की राजनीति में दखल रखने वाले दो राजनीतिक परिवारों के 'नाक' का सवाल ही बना हुआ है। दरअसल, राज्य की बेरमो और दुमका विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को मतदान होना है। 

संथाल परगना के 'हार्टलैंड' दुमका विधानसभा इलाके में जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो शिबू सोरेन के परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। वहीं दूसरी तरफ बोकारो जिले की बेरमो विधानसभा सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह के परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है।

दरअसल, दुमका विधानसभा इलाका झारखंड की राजनीति में खासा महत्व रखता है। राज्य गठन से लेकर अब तक हुए चुनावों पर नजर डालें तो दुमका विधानसभा सीट 2009 और 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के खाते में गई। वहीं 2005 और 2014 में यह क्रमशः निर्दलीय स्टीफन मरांडी और बीजेपी की लुईस मरांडी के पास रही। दुमका संसदीय क्षेत्र से झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन आठ बार सांसद रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि 2009 से लेकर 2019 तक हुए 3 विधानसभा चुनावों में मुकाबला जेएमएम और बीजेपी के बीच ही रहा है और उम्मीदवार एक तरफ जहां राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रहे हैं वहीं दूसरी तरफ बीजेपी की लुईस मरांडी रही हैं। इस बार दुमका में जेएमएम ने शिबू सोरेन के तीसरे बेटे बसंत सोरेन को उम्मीदवार बनाया है।

प्रदेश की राजनीति पर है सोरेन परिवार का दखल

दरअसल, शिबू सोरेन खुद राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनके बेटे हेमंत सोरेन फिलवक्त राज्य की सत्ता की बागडोर संभाल रहे हैं। वही उनके बड़े बेटे दुर्गा सोरेन जामा विधानसभा इलाके से विधायक रहे हैं। उनकी मृत्यु के बाद दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन फिलहाल जामा विधानसभा सीट से विधायक हैं। वही शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन और बेटी अंजलि सोरेन भी इलेक्टरल पॉलिटिक्स में भाग्य आजमा चुकी है लेकिन सफलता नहीं मिली है।

बेरमो सीट से चार बार विधायक रहे हैं स्वर्गीय सिंह

बोकारो जिले में बेरमो विधानसभा सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई है। वहां उनके बड़े बेटे और युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह को पार्टी ने मैदान में उतारा है। दरअसल राजेंद्र प्रसाद सिंह ने 1963 से अपना पॉलीटिकल करियर शुरू हुआ था और हाल के दिनों तक वह इंटक के राष्ट्रीय महासचिव रहे। इतना ही नहीं राज्य में बनी यूपीए सरकार में मंत्री रहे और ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग का दायित्व निभाया। सिंह एआईसीसी के मेंबर भी रहे और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के अध्यक्ष रहे। चार बार बेरमो सीट से विधायक रहे राजेंद्र सिंह के बड़े बेटे अनूप सिंह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश में है। अनूप के छोटे भाई गौरव सिंह फिलहाल कांग्रेस के युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं। इतना ही नहीं गौरव सिंह के श्वसुर कमलेश सिंह हुसैनाबाद इलाके आए एनसीपी के विधायक हैं।

बेरमो सीट के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो 2005 से लेकर 2019 तक हुए विधानसभा चुनावों में दो बार 2009 और 2019 में कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज कराई थी। वहीं 2005 और 2014 में बीजेपी के योगेश्वर बाटुल जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों उपचुनाव में बीजेपी ने अपने पुराने उम्मीदवारों को मौका दिया है।

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