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झारखंड HC का महत्वपूर्ण फैसला, 18000 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को किया रद्द

सरकारी नौकरी के लिए 2016 में बनी नियोजन नीति को हाई कोर्ट ने बताया गलत


रांची।

झारखंड सरकार द्वारा बनाए व लागू किए गए नियोजन नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 18000 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया है।

झारखंड हाइकोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के फैसले को गलत करार दिया है। हाइकोर्ट के आदेश के बाद अब झारखंड में वर्ष 2016 में बनी नियोजन नीति लागू नहीं होगी।

कुछ दिन पूर्व ही इस मामले में अंतिम सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था । सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने राज्य की नियोजन नीति को सही ठहराते हुए अदालत में कहा कि झारखंड की कई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही यह नीति बनाई गई है। पिछली सुनवाइयों के दौरान अदालत ने 11 जिलों से स्थगन हटा दिया था, अदालत के फैसले पर इनका भविष्य टिका हुआ था।

हाइकोर्ट की तीन न्यायाधीशों की बृहद खण्डपीठ ने सर्वसम्मति से यह आदेश पारित किया है। तीन जजों की बृहद खण्डपीठ में जस्टिस एचसी मिश्र,जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस दीपक रोशन शामिल हैं।

यहां बता दें कि अब तक सरकार की नियोजन नीति में अनुसूचित जिलों में गैर अनुसूचित जिलों के लोगों को नौकरी के लिए अयोग्य माना गया था। जबकि अनुसूचित जिलों के लोग गैर अनुसूचित जिले में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते थे। लेकिन हाइकोर्ट के आदेश के बाद अब झारखंड के किसी भी जिले का निवासी राज्य के किसी एक जिले से नौकरी के लिए आवेदन दे सकता है।

नियोजन नीति को चुनौती देते हुए प्रार्थी सोनी कुमारी के द्वारा याचिका दायर की गयी थी। जिसमें कहा गया था कि प्रार्थी गैर अनुसूचित जिले की रहने वाली है और उसने दूसरे जिले में हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति की परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था। लेकिन उनका आवेदन यह कहते हुए रद्द कर दिया गया कि वह गैर अनुसूचित जिले की हैं। आवेदन रदद् किये जाने के बाद प्रार्थी के द्वारा हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की गयी थी। अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि उनमें जो बहाली थी, उनको रद्द करते हुए सरकार दोबारा नियुक्ति नीति प्रक्रिया शुरु करें।

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