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गुरुकुल में शिक्षक दिवस निबंध प्रतियोगिता के विजयी हुए पुरस्कृत

त्रिदेव


देवघर। 

स्थानीय गुरुकुल कोचिंग सेंटर परिसर में पिछले दिन विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले आयोजित राष्ट्रीय स्तर के निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि प्रगतिशील लेखक संघ, देवघर इकाई के अध्यक्ष प्रो. रामनन्दन सिंह, वेकसो इंडिया के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, गुरुकुल की संचालिका डॉ. एकता रानी व गीता देवी डी ए वी पब्लिक स्कूल, कास्टर्स टाउन के शिक्षक शशि भूषण सिंह के करकमलों से प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

ज्ञात हो इस प्रतियोगिता में प्रायः सभी राज्यों के लगभग साढ़े नौ हजार प्रतिभागी शरीक हुए थे। जूनियर ग्रुप निबंध प्रतियोगिता में शीर्षक था ' कोरोना अवधि में शिक्षकों की भूमिका' जबकि सीनियर ग्रुप में था 'आधुनिक युग मे शिक्षकों की भूमिका' । जूनियर ग्रुप में डी ए वी, कास्टर्स टाउन की षष्ठ वर्ग की छात्रा आराध्या प्रिया को चतुर्थ, सप्तम वर्ग की जिया कुमारी एवं लिपिका कुमारी को क्रमशः सप्तम एवं दशम जबकि सीनियर ग्रुप में देवसंघ नेशनल स्कूल की अस्मिता हालदार को अष्टम स्थान प्राप्त कर शहर का नाम रौशन किया।

मौके पर मुख्य अतिथि प्रो. रामनन्दन सिंह ने कहा- विद्‌यार्थी जीवन मानव जीवन का स्वर्णिम काल होता है । जीवन के इस पड़ाव पर वह जो भी सीखता, समझता है अथवा जिन नैतिक गुणों को अपनाता है वही उसके व्यक्तित्व व चरित्र निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं । डॉ. देव ने कहा- हम कह सकते हैं कि विद्‌यार्थी जीवन मानव जीवन की आधारशिला है । इस काल में सामान्यत: विद्‌यार्थी सांसारिक दायित्वों से मुक्त होता है फिर भी उसे अनेक दायित्वों व कर्तव्यों का निर्वाह करना पड़ता है ।

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डॉ. एकता रानी ने कहा- प्रत्येक विद्‌यार्थी का अपने माता-पिता के प्रति यह पुनीत कर्तव्य बनता है कि वह सदैव उनका सम्मान करे । सभी माता-पिता यही चाहते हैं कि उनका पुत्र बड़ा हौकर उनका नाम ऊँचा करे । वह बड़े होकर उत्तम स्वास्थ्य, धन व यश आदि की प्राप्ति करे ।

शशि भूषण सिंह ने कहा-अपने गुरुओं, शिक्षकों अथवा शिक्षिकाओं के प्रति विद्‌यार्थी का परम कर्तव्य है कि वह सभी का आदर करे तथा वे जो भी पाठ पढ़ाते हैं वह उसे ध्यानपूर्वक सुने तथा आत्मसात् करे । वे जो भी कार्य करने के लिए कहते हैं उसे तुरंत ही पूर्ण करने की चेष्टा करे । गुरु का उचित मार्गदर्शन विद्‌यार्थी को महानता के शिखर की ओर ले जाने में सक्षम है । मौके पर सभी विजयी प्रतिभागियों के अभिभावकगण भी उपस्थित थे।


नमन

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