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श्रावणी मेला की इजाज़त नहीं,सीमित संख्या में आम दर्शन की व्यवस्था कर सकती है राज्य सरकार:SC


नई दिल्ली।

देवघर के बाबा बैद्यनाथ और दुमका के वासुकीनाथ मंदिर में आम दर्शन की व्यवस्था करने का मामला सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार पर छोड़ दिया है, लेकिन सरकार से आग्रह किया है कि यदि वह चाहे तो सीमित संख्या में आम दर्शन की व्यवस्था कर सकती है। इसके लिए सरकार एक मेकानिज्म तैयार कर सकती है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की अदालत ने यह निर्देश दिया। वहीं, झारखंड सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के साथ तपेश सिंह,कुमार अनुराग सिंह और पल्लवी लांगर ने पक्ष रखा।जबकि याचिकाकर्ता की ओर से समीर मल्लिक और केंद्र सरकार के लिए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना संकट को देखते हुए देवघर में श्रावणी मेला का आयोजन करने की मंजूरी देने से शुक्रवार को इन्कार कर दिया। खंडपीठ ने हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इन्कार करते हुए कहा कि झारखंड सरकार लॉकडाउन में छूट को देखते हुए धार्मिक स्थलों को खोलने पर विचार कर सकती है, लेकिन इसके लिए सामाजिक दूरी और अन्य दिशा-निर्देशों का ध्यान रखने की जरूरत है। 

सीमित दर्शन की व्यवस्था कर सकती है सरकार:SC 

अदालत ने झारखंड सरकार से कहा कि वह चाहे तो एक दिन में सीमित संख्या में दर्शन की व्यवस्था कर सकती है। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर आवेदन ले सकती है और सभी का अलग – अलग समय निर्धारित कर सकती है। अदालत ने बैद्यनाथ मंदिर में भारी संख्या में पुरोहितों के प्रवेश पर चिंता जतायी और कहा कि मंदिर के अंदर पुरोहितों की संख्या सीमित होनी चाहिए, ताकि सोशल डिस्टेसिंग का पालन हो सके। 

सुनवाई के दौरान निशिकांत दुबे की ओर से अदालत को बताया गया कि पूरे देश में धार्मिक स्थलों को खोल दिया गया है, लेकिन झारखंड में इसकी अनुमति नहीं दी गयी है। सरकार ने इस बार सावन और भादो माह में होने वाले कांवर यात्रा की अनुमति भी नहीं दी है।

HC के वर्चुअल दर्शन के फैसले को निशिकांत ने SC में दी थी चुनौती

भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए बैद्यनाथ धाम में वार्षिक मेले के आयोजन की इजाजत देने की मांग करते हुए हाइकोर्ट के वर्चुअल दर्शन के फैसले को चुनौती दी थी. याचिकाकर्ता के वकील समीर मलिक ने खंडपीठ को कहा कि 30 हजार पुजारियों को मंदिर जाने की इजाजत है, लेकिन भक्तों को नहीं। 

इस पर न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने कहा कि ऐसा व्यवहार क्यों हो रहा है और झारखंड सरकार के वकील सलमान खुर्शीद से आधे घंटे में इसका जवाब देने को कहा। न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि ई-दर्शन और वास्तविक दर्शन में अंतर है। 

इस पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी धार्मिक स्थलों को बंद करने का फैसला लिया है और बढ़ते मामलों को देखते हुए मंदिर के खोलने का कोई सवाल नहीं है। खुर्शीद ने खंडपीठ को बताया कि राज्य में 31 अगस्त तक लॉकडाउन है और मेला के दो दिन पहले पूर्व के आदेश को निरस्त करने से अफरा-तफरी मच सकती है। 

सांसद निशिकांत दुबे ने दायर की थी एसएलपी

गौरतलब है कि गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने देवघर में लगने वाले श्रावणी मेले के आयोजन के लिए पहले राज्य सरकार से पत्र लिख कर आग्रह किया था कि बाबाधाम में पूजा करने की इजाजत दी जाये। सरकार से मंजूरी नहीं मिलने पर अनुसार उन्होंने झारखण्ड हाइकोर्ट में बाबाधाम में पूजा शुरू करने को लेकर जनहित याचिका दायर की थी. निशिकांत दुबे ने हाईकोर्ट में बाबा बैद्यनाथ मंदिर को कोविड-19 के दौरान कुछ निश्चित शर्तों के साथ खोले जाने की इजाजत मांगी गयी थी। झारखंड हाईकोर्ट ने सावन मेला के आयोजन की इजाजत नहीं दी थी।  जिसके बाद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 


नमन

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