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इटली के Alps पर्वत पर बर्फ हुई गुलाबी, वैज्ञानिक हैरान


नई दिल्ली।

यूरोप के सबसे ऊंचे बर्फीले पहाड़ों पर अब बर्फ का रंग सफेद नहीं रहा। वह पिंक होता जा रहा है।

दुनिया में इन दिनों अजीबोगरीब घटनाक्रम घट रहे हैं। अजीबो-गरीब प्राकृतिक बदलावों को देख कर वैज्ञानिक भी परेशान है। क्योंकि ये बदलाव खूबसूरत तो दिखते हैं लेकिन ये पर्यावरण के हिसाब से गलत है।

अब इटली के Alps पर्वत पर गुलाबी शैवाल की बर्फ मिली है। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद वैज्ञानिकों द्वारा इस शैवाल का परीक्षण शुरु कर दिया गया है। इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है। अब इस बात पर बहस जारी है कि आखिर यह गुलाबी शैवाल कहां से आई है, लेकिन इटली की नेशनल रिसर्च काउंसिल Biagio Di Mauro ने कहा कि गुलाबी बर्फ Presena Glacier के कुछ हिस्सों में देखी गई थी, यह ग्रीनलैंड में जो पौधा पाया गया था उसकी वजह से हुई थी।

Di Mauro जिसने स्विट्जरलैंड में Morteratsch Glacier पर मौजूद शैवालकी का भी पहले अध्यन किया था, उसका कहना है कि 'यह शैवाल खतरनाक नहीं है, यह गरमी और वसंत के मौसम में होने वाले एक प्राकृतिक घटनाक्रम है।'
बर्फ
एक पौधा जिसका नाम Ancylonema nordenskioeldii है, वह GreenLand के डार्क जोन में पाया जाता है, जहां बर्फ भी पिघलती है। आमतौर पर बर्फ सूर्य के 80 फीसदी विकिरणों को वातावरण में लौटा देती है, लेकिन जब शैवाल उत्पन्न होती है, तो वह बर्फ को ढंक लेती है और इससे ज्यादा गर्मी अवशोषित होती है और इस वजह से बर्फ तेजी से पिघलने लगती है। जितनी ज्यादा मात्रा में शैवाल होती है उतनी तेजी से बर्फ का पिघलना होता है।

इटैलियन एल्पस के पासो गैविया नाम की जगह पर सबसे ज्यादा बर्फ गुलाबी हुई है। इस जगह की ऊंचाई 8590 फीट है. अगर यहां से तेजी से बर्फ पिघली तो इस पहाड़ के नीचे स्थित आबादी वाले इलाकों को दिक्कत हो जाएगी।

बता दें कि कोरोना संकट ने इस वक्त पूरी दुनिया में हड़कंप मचा रखा है। इसके पूर्व लंबे अर्से से वैज्ञानिक दुनिया में बढ़ रही ग्लोबल वॉर्मिंग से चिंतित हैं। इसे लेकर कई देश अलग-अलग योजनाओं पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक की कोशिशें नाकाफी होने की वजह से अब तक इस पर लगाम लगा पाना संभव नहीं हो सका है।

गौरतलब है कि मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के लिए वैज्ञानिक ग्लोबल वॉर्मिंग को भी बड़ा जिम्मेदार मानते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि पर्यावरण का तेजी से नुकसान हो रहा है, इसका सीधा असर मानव के अस्तित्व पर नजर आ रहा है।

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