Global Statistics

All countries
178,606,671
Confirmed
Updated on Saturday, 19 June 2021, 11:22:45 am IST 11:22 am
All countries
161,410,248
Recovered
Updated on Saturday, 19 June 2021, 11:22:45 am IST 11:22 am
All countries
3,867,057
Deaths
Updated on Saturday, 19 June 2021, 11:22:45 am IST 11:22 am

Global Statistics

All countries
178,606,671
Confirmed
Updated on Saturday, 19 June 2021, 11:22:45 am IST 11:22 am
All countries
161,410,248
Recovered
Updated on Saturday, 19 June 2021, 11:22:45 am IST 11:22 am
All countries
3,867,057
Deaths
Updated on Saturday, 19 June 2021, 11:22:45 am IST 11:22 am
spot_imgspot_img

कमजोर रेटिंग के पीछे कहीं चीन तो नहीं: डॉ. निशिकांत

निशिकांत  Written by: डॉ. निशिकांत दुबे 

नई दिल्ली।

मूडीज की नई रेटिंग ने भारत सरकार और विभिन्न कंपनियों के सामने धन जुटाने को लेकर मुश्किलें पैदा कर दी हैं, क्योंकि सारी दुनिया मौजूदा कर्ज को जोखिम में देख रही है और वे नया कर्ज देने को लेकर सशंकित हैं। उच्च रेटिंग से कर्ज पर ब्याज दरों को नियंत्रित रखने या कम करने में मदद मिलती है और इस तरह वह सरकार और उद्योगों को और अधिक कर्ज लेने के लिए सक्षम बनाती है।

 मूडीज ने इसी महीने जो ताजा रेटिंग जारी की है, वह भविष्य के कर्जों पर ब्याज दर बढ़ाएगी, जिससे भारत आर्थिक रसातल की ओर जा सकता है। मूडीज ने भारत की आधारभूत संरचना से जुड़ी कंपनियों और बैंकों की रेटिंग्स में भी कमी की है, जिससे उनके लिए नए कर्ज लेने में और ऐसी नई परियोजनाओं को शुरू करने में मुश्किलें आएंगी, आर्थिक सुस्ती के माहौल में जिनकी जरूरत है। इससे अर्थव्यवस्था को सुस्ती से उबारने के भारत के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

रेटिंग एजेंसियां विभिन्न तरह के कर्जों के जोखिम से जुड़ी विश्वसनीय जानकारियां निवेशकों को मुहैया कराने के लिए होती हैं। हालांकि इन रेटिंग एजेंसियों ने गलत स्टेटमेंट्स और बैंकों तथा उनके कर्जदारों की गलत रेटिंग निर्धारित कर लोगों के साथ छलावा किया है और भारत में वित्तीय मुश्किलें बढ़ाई हैं। इस तरह रेटिंग एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था की परोक्ष नियामक बन गई हैं और उन्होंने समानांतर सत्ता हासिल कर ली हैं, ताकि वे बाजार को अपने हितों के लिए प्रभावित कर सकें। अमेरिका स्थित बड़ी रेटिंग एजेंसियों का स्वामित्व एसपीवी के जरिये चीनी सरकार और वहां के निवेशकों के पास है। नतीजतन चीनी फर्जी रेटिंग के जरिये भारतीय अर्थव्यवस्था में हेरफेर कर सकती हैं और दक्षिण एशियाई राजनीतिक परिदृश्य में अपना प्रभाव बढ़ा सकती हैं।  इसके उलट तीन बड़ी रेटिंग एजेंसियों में से मूडीज अतीत में भारत की वित्तीय परिस्थितियों और आर्थिक भविष्य को लेकर सबसे अधिक आशान्वित थी। हालांकि हाल के वर्षों में नीतिगत बदलाव के बाद मूडीज ने भारत की रेटिंग गिराई है और हमारी उत्पादकता को कम किया है। ये रेटिंग एजेंसियां लंबे समय तक हमारे देश की सही वित्तीय ताकत पर गौर नहीं करती थीं, जिसमें कर्ज से जीडीपी के अनुपात में आई कमी, पिछले छह वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुई वृद्धि, युवा आबादी, अंग्रेजी बोलने वाले सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों की दुनिया की सबसे बड़ी आबादी जैसे कारक शामिल हैं। ये रेटिंग एजेंसियां कम्युनिस्ट प्रभुत्व वाले पश्चिमी मीडिया की नकारात्मक और फेक न्यूज को पचास फीसदी वेटेज देती हैं। 

क्या स्टैंडर्ड ऐंड पुअर के प्रमोटर और क्रिसिल के मुख्य शेयरहोल्डर किसी ऐसे देश का नाम बता सकते हैं, जहां उन्होंने भारत से अधिक धन कमाया? वे नहीं बता सकतीं। भारत रेटिंग एजेंसियों के लिए मुनाफे का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, लेकिन वे भारत की रेटिंग सुधारने के लिए तैयार नहीं हैं, बल्कि वे हमारी रेटिंग गिराने की धमकी देती हैं। रेटिंग्स को यूपीए सरकार ने अनिवार्य बनाया था, क्योंकि वे अपने वित्तीय और आर्थिक डाटा भारत में खरीदने और संग्रहित करने के प्रति अनिच्छुक थी।

 प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले छह वर्षों के दौरान जरूरत से अधिक डाटा एकत्र कर हमारे बैंकों में रखे गए हैं और रेटिंग एजेंसियों पर निर्भरता खत्म की गई है, जिससे उनकी परोक्ष नियामक सत्ता खत्म हो सकती है। आखिर निजी विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाली विदेशी रेटिंग एजेंसियां भारत में कर्ज के लिए परोक्ष नियामक कैसे हो सकती है? गौर कीजिए कि चीन और रूस इन विदेशी रेटिंग एजेंसियों को अपने देश में काम करने की इजाजत नहीं देते।

 2008 के वित्तीय संकट के बाद अमेरिका ने एक ऐक्ट के जरिये क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के अधिकार वापस ले लिए थे। यदि इन एजेंसियों के स्टेटमेंट्स गलत पाए जाएं और निवेशक भ्रमित हों, तो उन्हें दंडित करने का प्रावधान किया गया। यदि भारत में ऐसी नीति बनाई जा सके, तो सरकार को नुकसान पहुंचाने वाले आकलनों के लिए रेटिंग एजेंसियों को दंडित करने का अधिकार मिल सकेगा।

लेखक डॉ.निशिकांत दुबे, गोड्डा लोकसभा से भाजपा सांसद हैं.

Leave a Reply

Hot Topics

Related Articles