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कोविड -19 : चैलेंजेज एण्ड ऑपर्च्युनिटीज

नागेश्वर sharma  By: प्रो.डॉ0 नागेश्वर शर्मा

देवघर।

कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन के वुहान शहर में दिसंबर, 2019 में हुई और विगत पांच महीने में तेजी से फैलने वाले इस वायरस ने समस्त विश्व को अपनी गिरफ्त ले लिया है । आज इस खतरनाक वायरस से न केवल भारत जैसे विकासशील देश परेशान हैं ,बल्कि समस्त विकसित देश अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, रूस, जापान इस वायरस से बुरी तरह प्रभावित हैं । अभी तक इस वायरस की रोकथाम के लिए न तो कोई दवाई, न ही कोई वैक्सीन वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं द्वारा खोजा गया है। फिलहाल यह वायरस वैश्विक चुनौती बनी हुई है । 

करोना वायरस :चुनौतियाँ 

जब कभी कोई समस्या या आपदा आती हैं, तो वह अपने साथ अवसर भी लाती है । कोरोना वायरस जिसने वैश्विक महामारी का रूप धारण कर लिया है, निसंदेह सकल मानव संसाधन के समक्ष अनेकों चुनौतियाँ पेश किए हुए है । इससे उत्पन्न पहली गंभीर चुनौती तेजी से फैलने वाले इस वायरस से लड़ने की है । इसे रोकने की है । इस पर विजय हासिल करने की है । इस चुनौती पर विजय पाने हेतु भारत समेत समस्त विश्व जद्दोजहद कर रहा है ।पर अभी तक चुनौती बनी हुई है । दूसरी चुनौती जो इस वायरस ने पैदा की है, वह है आर्थिक संकट की चुनौती । इस वायरस के फैलाव को रोकने के लिए लाकडाउन यानी पूर्ण बंदी की गई और दो महीने के लाकडाउन ने अर्थव्यवस्था को पंगु बना दी । पंगु बनी हुई अर्थव्यवस्था में फिर से जान डालने की विशाल चुनौती सामने है । तीसरी चुनौती जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक विकट स्थिति पैदा किए हुए है, वह है प्रवासी मजदूरों की बडे पैमाने पर घर वापसी । इन मजदूरों की सकुशल घर वापसी से लेकर उनके जांच की व्यवस्था और फिर उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करने जैसी कई चुनौतियां हैं सामने । कोरोना ने वैश्विक राजनीति की दशा दिशा को भी झकझोर दिया है ।इस बदली हुई प्रस्थिति में सही वैदेशिक नीति एवं व्यापार नीति तय करना भी एक चुनौती है । 

कोरोना में अन्तरनिहीत ऑपोरच्युनिटीज 

चुनौतियों में ही अवसर खोजना, उसका समाधान ढूंढना मानवीय स्वाभाव है । इतिहास गवाह है है कि जब कभी भी मानव के समक्ष चुनौतियां आई है, तो मानव ने हथियार डालने के बजाय उस पर विजय पाने या उससे निजात पाने के लिए अवसर ढूंढ निकालने का प्रयास किया है । आज भी कोरोना को अवसर के रूप मे बदलने का प्रयास जारी है ।कोरोना ने भारत मे जब पांव पसारना शुरू किया था, तब हमारे पास इसकी रोकथाम के लिए प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नही थी । कोरोना वारियर्स के लिए पी पी ई किट तक भी व्यवस्था नही थी । बाहर से आयात भी किया गया, जो घटिया किस्म का था । बस क्या था, सरकार समेत कई स्वंय सेवी संस्थाओं ने इसका निर्माण शुरू किया और अच्छे किस्म का किट तैयार किया गया । मास्क का बड़े पैमाने पर घरेलू निर्माण के अवसर की उत्पत्ति कोरोना की ही देन है ।टेस्ट लैब बहुत ही कम तादाद में था । अगर यह प्रकोप नही आया होता तो शायद ही हम लैब की संख्या बढाते । स्वास्थ्य अभी तक हमारी प्राथमिकता सूची में नही था । इस महामारी ने चिकित्सा के संरचनात्मक ढांचे मे बदलाव के अवसर भी दिए हैं । हमें जीने के नये ढंग का अवसर भी प्रदान किया है । लास्ट बट नोट दी लिस्ट, कोरोना ने हमें विकास के असंतुलित माडल में बदलाव लाकर आर्थिक असमानताओ की बढ़ती हुई खाई को पाटने का अवसर दिया है । साथ ही, ग्रामीण रोजगार सृजन की व्यवस्था के लिए एक अवसर दिया है । सभी कोरोना वारियर्स को नमन करते हुए ।

लेख़क प्रोफेसर (डॉक्टर )नागेश्वर शर्मा भारतीय आर्थिक परिषद के संयुक्त सचिव है. ये लेखक के निजी विचार है.

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