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#Lockdown: क्या आपने सोचा है कि आपके गली-मोहल्ले के व्यापारी किस कशमकश से गुज़र रहे?

Written By:  गोपाल कृष्ण शर्मा

देवघर।

हम छोटे-बड़े सभी व्यापारियों की देश की अर्थव्यवस्था के सफल संचालन में बहुत ही अहम भूमिका रहती है, ऐसा हम सभी कहतें हैं। देश पर आए किसी भी संकटपूर्ण स्थितियों में फिर चाहे वह कारगिल का युद्ध काल हो या सुनामी की भयावहता ,भुकंप की थर्र-थर्राहट हों या फिर बाढ़ की विभीषिका हर जगह विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी सेवा देनेवाले हम व्यवसायी ही अग्रणी भूमिका में होते है ! हम आपदा के समय अपनी-अपनी तिजोरियों के ताले देश हित में खोल डालते हैं।  क्योंकि हम जानते हैं *देश सुरक्षित तो हम सुरक्षित*

कोई भी सार्वजनिक पूजा हो या हवन-यज्ञ मंदिर का निर्माण हो या धर्मशाला का निर्माण, दल विशेष की रैली हो या कवि गोष्ठी हम व्यापारियों को “सप्रेम दान “ , “सप्रेम सहयोग “ की एक रसीद पकड़ा दी जाती है।  अब समय आता है देश हित में सारे टैक्सों की रक़म जमा करने का। अच्छा आप टैक्स की भारी भरकम रक़म जमा कराकर भले ही संतुष्ट हो लें पर सरकार संतुष्ट नहीं होती, सरकारी नुमाइंदे आप पर सदैव शंका भरी तिरछी नज़र बनाए रखते है। कमाईं के कुछ बचे -खुचे अंश के बल पर हम जब अपने परिवार के साथ सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं तब हम कुछ असामाजिक तत्वों की नज़र में बने रहते हैं. 

* सदैव ही सरकार की अपेक्षा हम व्यापारियों से होतीं हैं। लेकिन, हमारी अपेक्षाओं को कौन सुनेगा और कब ?

इसी कड़ी में वर्तमान परिस्थितियों को ही ले लीजिए! एक तरफ़ Lockdown के कारण लाखों की संख्या में व्यापारी आज अपने प्रतिष्ठानों को बंद करके घर पर बैठे हुए हैं और अपने परिवार के साथ अपने शहर के ज़रूरतमंद लोगों के बीच राहत सामग्री तथा विभिन्न प्रकार की सहायता पहुँचाने का कार्य अपने अपने स्तर से कर रहे हैं। साथ ही ज़िला प्रशासन हो या राज्य सरकार या केंद्र सरकार के रिलीफ़ फंड में भी यथाशक्ति सहयोग राशि दे रहे हैं।  बग़ैर इसकी परवाह किए की दुकान का *रेंट*, बिजली बिल हो या स्टाफ का *वेतन* या फिर व्यापार हेतु लिए गए ऋण का *ब्याज* का भुगतान भी आगे करना है। कौन देखेगा इनको?

दूसरी तरफ़ Lockdown खत्म होते ही तमाम ऑनलाइन कंपनियां जैसे अमेजॉन, फ्लिपकार्ट इत्यादि एक से एक ऑफर निकाल कर ग्राहकों को अपनी और आकर्षित करेंगे और उसी प्रकार मॉल वाले भी भीड़ जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। *कभी किसी ने सोचा हैं कि वाकई गली-मोहल्ले के व्यापारियों के समक्ष आने वाला यह समय कितना संकटमय होगा? *आज आपदा के समय आपके गली/मुहल्ले /शहर के व्यापारी ही आपकी छोटी-बड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जान की परवाह किए बग़ैर आपकी सेवा कर रहे हैं।

* परिस्थितियों के बदलते ही ग्राहकों का नज़रिया भी इनके प्रति बदल जाएगा। तमाम ऑनलाइन कंपनियाँ इस वैश्विक आपदा के समय भारत के लिए क्या कर रही है कोई बताएगा ? *कौन दिलाएगा न्याय ?*

आवश्यकता है सरकार को भी इस ओर ध्यान केंद्रित करने की।  जागो ग्राहक जागो !! मत ख़रीद करो ऐसे ऑनलाइन स्टोरो से जो बुरे दिनों में अपना सामाजिक दायित्व निभाना नहीं जानते। आप ही देखेंगे इनको।  आपसे ही मिलेगा न्याय। 

लेखक गोपाल कृष्ण शर्मा संथाल परगना चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष हैं।  उक्त बातें लेखक के निजी विचार हैं। 

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