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बदलता मौसम भी प्रभावित करता है हमारे मस्तिष्क को: डॉ. नितीश प्रियदर्शी

डॉ नितीश   By: डा. नितीश प्रियदर्शी

रांची। 

झारखण्ड में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं ने लोगों को चिंता में डाल दिया है और इसके कारणों पर अपने-अपने तरीके से विवेचना कर रहे हैं I वैसे तो आत्महत्याओं के बढ़ते कारणों में सबसे प्रमुख है रिश्तों में दरार एवं दिमाग पर बढ़ता दबाव I रांची या झारखण्ड के दुसरे जगहों में बढ़ते इस घटनाओं का कारण केवल यही है या इसका कारण कुछ और भी हो सकता है ?

दिमाग को प्रभावित करता है मौसम 

पिछले कई वर्षो से वैज्ञानिकों ने अपने शोध में ये पाया है कि मौसम में बदलाव या यू कहे कि मौसम का भी प्रभाव हमारे दिमाग को प्रभावित करता हैI इस प्रभाव को “सीजनल अफेक्टिव डीसआर्डर”( सैड) के नाम से जाना जाता है I  ये डीसआर्डर ज्यादातर सर्दियों के मौसम में देखने को मिलता है जब सूर्य की रौशनी काफी कम हो जाती है I इसका प्रभाव शारीर के जैवीय समय (बॉडी क्लॉक) को प्रभावित करता है तथा शारीर में मौजूद हार्मोन्स भी इससे प्रभावित होते हैं I इसके लक्षण हैं डीप्रेशन, उदासी , अलासपन, थकान और खूब नींद आना भूख नहीं लगना या अत्यधिक  खाना  I 

सर्दियों में या तेज गर्मी में अवसाद से प्रभावित हो सकते हैं….

लोगों का मस्तिष्क सालों भर नार्मल रहता है, वे कभी-कभी सर्दियों में या तेज गर्मी में अवसाद से प्रभावित हो सकते हैं I अमरीकी राष्ट्र औषधालय के पुस्तकालय के अनुसार कुछ लोगों का मूड मौसम के बदलने से बदल जाता है। ये लोग काफी सोते हैं, इनमे उर्जा  की कमी होती है और ये अवसाद से भी काफी प्रभावित होते हैं. और आत्महत्या करने की भी प्रवृति रखते हैं I यहाँ तक भी माना गया है कि अगर काफी दिनों तक तेज गर्मी रहती है तो कुछ लोगों में अपराध करने की प्रवृति बढ़ जाती है I इसका कारण है तेज गर्मी के वजह से लोगों में गुस्सा करने की प्रवृति बढ़ जाती है . 

काफी दिनों तक वर्षा भी होती रहे तो लोग अवसाद से ग्रसित हो जाते हैं ….

अगर काफी दिनों तक वर्षा भी होती रहे तो लोग अवसाद से ग्रसित हो जाते हैं I रांची का मौसम जो पहले काफी सुहाना होता था आज बदलते शहरीकरण की वजह से काफी बदल गया है. कभी अति गर्मी तो कभी अति वृष्टि , तो कभी अत्यधिक ठण्ड I इस तेजी से बदलते मौसम के चलते हमारे दिमाग भी अछूते नहीं रहते I इनमे भी काफी बदलाव आता है जिनको हम समझ नहीं पातेI जिस तरीके से रांची का मौसम बदलता है लोगों को अवसाद से प्रभावित होना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है I 

जलवायु और प्रदूषण कर रहा दिमाग को प्रभावित 

आज जिस तरीके से हमारी जलवायु बदल रही है तथा प्रदुषण बढ़ रहा है उससे हमारा शारीर और दिमाग भी प्रभावित हो रहा है I हवा एवं जल में धातु प्रदुषण भी हमारे शारीर एवं दिमाग  को प्रभावित कर रहा है I जिस जगह पर बाढ़ या भूकंप आता है वहां के लोग काफी दिनों तक मानसिक अवसाद एवं भय ( ट्रोमा ) से ग्रसित रहते हैं तथा कभी कभी आत्महत्या भी कर लेते हैं I   

अब ये माना जा सकता है की सामाजिक कारणों के अलावा तेजी से बदलते मौसम एवं जलवायु भी हमको प्रभावित कर रहे हैं I


बीकानेर

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