spot_img

हर बार अपना नेता बदलती है सारठ की जनता, इस बार किसे देगी मौका ?

Railway ने Odisa Train Accident की CBI जांच की सिफारिश की

Deoghar: मारपीट को लेकर मामला दर्ज

Deoghar: छत ढलाई के दौरान गिरा मजदूर, जख्मी

N7India.Com (DESK)

 देवघर/सारठ।

संताल परगना का सारठ विधानसभा हर चुनाव में चर्चा का विषय रहा है। यहां वोट बैंक का समीकरण हर बार फेल कर जाता है। जिस राजनीतिक पंडित ने जातीय समीकरण के हिसाब से जोड़ घटाव किया वह हमेशा कारगर रहा है। एक महत्वपूर्ण बात पर गौर किया जाय तो सारठ की जनता हर बार अपना नेता बदल देती है।

बीकानेर

पिछले तीन चुनाव की बात करें तो 2005 में उदय शंकर सिंह आरजेडी से विधायक बने,फिर, जब 2009 में चुनाव हुआ तो सारठ ने अपनी पसंद बदल डाली और झामुमो के शशांक भोक्ता को विधायक बना दिया। पिछली बार जब 2014 में चुनाव हुआ तो यहां की जनता की पहली पसंद रणधीर सिंह रहे। इस बार इन तीन धुरंधरों में एक धुरंधर शशांक भोक्ता को झामुमो ने बैठा दिया है और उनके बदले परिमल सिंह को मैदान में उतारा है। परिमल सिंह भी राजनीति में नए नही हैं। अपने व्यवसाय को संभालते-संभालते ये दशकों से जनता से जुड़े हैं और समय-समय पर इन्होंने भी सुर्खियां बटोरी हैं। यूं कहें तो इस बार भी तीन धुरंधर फिर मैदान में हैं। अब जनता किसे पसंद करती है यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि अबतक के परिणामों की समीक्षा की जाय तो यहां की जनता लेबल कम चेहरा ज्यादा पसंद करती हैं।

भाजपा के सामने चुनौती

इस बार के चुनाव के लिए भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। क्योंकि पहली बार कोई सिटिंग विधायक सारठ की सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहा है। क्योंकि उन्हें बड़ी संख्या में जनता की पसंद उदय शंकर सिंह और परिमल सिंह को भी मात देनी है। पिछली बार 2014 में भाजपा की टिकट पर उदय शंकर सिंह दूसरे स्थान पर थे। 2009 में भी उदय शंकर सिंह दूसरे स्थान पर ही रहे थे। पिछले दो चुनाव के एक धुरंधर के बदले परिमल सिंह मैदान में हैं। इन सभी धुरंधरों को मात देने की बड़ी चुनौति है रणधीर सिंह के समक्ष। 

अब देखना दिलचस्प होगा कि सारठ की जनता किसे अपने सर आँखों पर बैठाती है. 


Leave a Reply

Hot Topics

Related Articles

Don`t copy text!