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जो नहीं बना चुनावी मुद्दा: मधुपुर में अब तक नहीं खुल पाया ब्लड बैंक

By: एजाज़ अहमद 

मधुपुर।

16 जनवरी 1992 में ‘‘मधुपुर’’ ने अपने प्रखंड से अनुमंडल का सफर तय किया. मधुपुर को अनुमंडल का दर्जा हासिल तो हो गई. लेकिन जनमानसों को मिलने वाली कई अति महत्वपूर्ण सुविधायें आज भी वेटिंग लिस्ट में है. इनमें  ब्लड बैंक खोले जाने की मांग भी चिरलंबित है. 

अनुमंडलीय अस्पताल का ब्लड स्टोरेज-रेफ्रिजरेटर है बंद

ब्लड बैंक नहीं होने के कारण लोगों को काफी दिक्कते होती रही हैं. ऐसे में ब्लड का अभाव से जनमानसों की जान तक चली जाती है. हालांकि मधुपुर के अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लड स्टाॅरेज रेफ्रिजरेटर एवं अन्य इक्युपमेंट लगाये गये. लेकिन लाईसेंस के अभाव में मशीने भी बंद पड़ी है. बताया जाता है कि साल 2013 से 2015 तक उक्त मशीन को व्यवहार में लगाया गया था. फिलहाल लाईसेंस नहीं रहने के कारण बंद है. 

रक्तदान के प्रति सजग है मधुपुर के युवा

मधुपुर में किसी को खून की जरूरत आन पड़े तो युवाओं की टोली रक्तदान को लेकर अपने-अपने कदम आगे बढ़ाते आये है. थोड़ी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. लेकिन लोगों की जान बचा ली जाती है. रक्तदाताओं का कहना है कि मधुपुर में ब्लड बैंक की काफी आवश्यकता है. ब्लड बैंक खुलने पर जरूरतमंदों को बिना समय गंवाये आसानी से ब्लड दिया जा सकता है. हालांकि स्थानीय युवाओं द्वारा रक्तदान को लेकर अलग-अलग व्हाट्सअप ग्रूप भी चलाये जा रहे हैं. 


विनायक

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