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देश के चार जगहों में से एक यहां है ‘संविधान की मूल प्रति’,तिजोरी में रहती है बंद

Reported by: आशुतोष श्रीवास्तव 

 गिरिडीह।

भारतीय संविधान की मूल प्रति केंद्रीय पुस्तकालय गिरिडीह में सुरक्षित है। 231 पृष्ठों वाली इस प्रति में देश के तमाम दिवंगत राजनेताओ के हस्ताक्षर मौजूद है। लेकिन विडंबना यह है कि जागरूकता के अभाव में संविधान की मूल प्रति अलमीरा में बंद रहता है.

लिहाजा, लोगो को जागरूक होने के बावजूद ऐतिहासिक धरोहर के प्रति जिला प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई है. ऐसे में संविधान की मूल प्रति के ऊपर धूल की परते बैठ गयी है. आपको बता दे कि सेंट्रल लाइब्रेरी में यह प्रति पिछले 30 वर्षो से अधिक समय से मौजूद है। सामान्य तौर पर यह अलमारी में सुरक्षित रहती है। हांलाकि इस बारे में बताया जाता है कि यह शहर के लिए यह धरोहर खास है।

 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था। लिखित रूप में इस संविधान को बनाने में देश के कई नेताओं का योगदान था। इस संविधान की एक मूल प्रति गिरिडीह की सेंट्रल लाइब्रेरी में रखी हुई है। संविधान की यह मूल प्रति इतिहास की धरोहर होने के साथ-साथ अमूल्य है। इस कृति में भारत के पहले राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद के साथ प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के हस्ताक्षर प्रमुख रूप से हैं। संविधान की इस प्रति में उन सभी सदस्यों के हस्ताक्षर हैं, जो संविधान समिति में थे।

इनमें संविधान ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान निर्माण समिति के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा के साथ ही डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पं. जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, कन्हैया लाल मुंशी, सी राजगोपालाचारी, सरोजनी नायडू, बिजयलक्ष्मी पंडित, दुर्गाबाई देशमुख आदि के नाम शामिल हैं।

सुनहरे पन्नों वाली इस प्रति में 255 आर्टिकल्स को लिथोग्राफी में उतारा गया है। मूल प्रति का डिजाइन शांति निकेतन के कलाकार राममनोहर सिन्हा और नंदलाल बोस ने तैयार किया था। लेकिन विडंबना इस बात कि है कि राष्ट्रीय संविधान दिवस के मौके पर मूल प्रति को गिरिडीह में सार्वजनिक नही किया जाता है।

पुस्तकालय में पहुंचकर स्टडी करने वाले स्टूडेंट का भी मानना है कि सविधान की मूल प्रति के बारे में वह तो सुने है लेकिन देखे नहीं है. ऐसे में पुस्तकालय में आने वाले स्टूडेंट में आक्रोश है जबकि जिला प्रशासन का इसमें अलग ही तर्क है.

लाइब्रेरी के केयर-टेकर विनोद कुमार अग्रवाल का साफ कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से संविधान दिवस को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं मिला है. वही गिरिडीह के केंद्रीय पुस्तकालय में संविधान की मूल प्रति होने की सूचना पर सदर डीएसपी नवीन सिंह लाइब्रेरी पहुंचे और मूल प्रति का अवलोकन किया। 

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