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कौमी एकता का मिसाल है बड़कीटाण्ड का दुर्गा मंडप,हिन्दू-मुस्लिम मिल करते हैं पूजन व्यवस्था 

Reported by:आशुतोष श्रीवास्तव 

गिरिडीह।

आज सामाजिक वैमनस्यता के बीच एक सुकुन भर दृश्य गांडेय प्रखंड अंतर्गत बड़कीटांड़ पंचायत के हरिजन मोहल्ला स्थित दुर्गा मंडप में दिख रहा है।

यहां का दुर्गापूजा हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। आजादी के पूर्व स्थापित हरिजन मोहल्ला स्थित दुर्गा मंडप में दोनों समुदाय के लोग मिलकर पूजा करते हैं। साथ ही मेले का आयोजन भी करते हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 1941 में स्वर्गीय भोली दास ने दोनों समुदाय के सहयोग से बड़कीटांड़  हरिजन मोहल्ला में पूजा की शुरुआत की थी तब से लेकर आज तक हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर पूजा तथा मेले का आयोजन करते हैं।

बताया जाता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी मन्नत मांगते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। जिससे बड़कीटांड़ हरिजन मोहल्ला स्थित दुर्गा मंडप में दोनों समुदाय के लोगों की भीड़ जुटती है और दोनों समुदाय के लोग मिलकर पूजा के बाद विसर्जन भी सौहार्दपूर्ण माहौल में मिलजुल कर करते हैं।

पूजा कमेटी के राजकुमार रविदास ने बताया कि पूजा के बाद विसर्जन में परंपरा के मुताबिक बुद्धन मियां के बैलगाड़ी से दुर्गा माता की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता था। आधुनिकता में बैलगाड़ी की परंपरा वर्तमान में खत्म हो गई है। परिणाम स्वरूप दोनों समुदाय के लोग मिलकर ट्रैक्टर में प्रतिमा विसर्जित करते हैं नवमी के दिन मेले का आयोजन में दोनों समुदाय के लोग मिलकर शांतिपूर्ण माहौल में मेले का आनंद लेते हैं।

पूजा शांतिपूर्ण माहौल में हो इसके लिए गठित पूजा समिति के गठन में भी आराम से ही दोनों समुदाय के लोगों ने हाथ बटाया है वर्षों पूर्व बनी परंपरा आज भी कायम है और पूजा समिति के गठन में दोनों समुदाय के लोग समान रूप से भागीदारी निभाते हैं. बड़कीटांड़ हरिजन मोहल्ला दुर्गा पूजा को लेकर गठित पूजा समिति सदस्यों में दोनों समुदाय के लोगों की समान भागीदारी रहती है। समिति में सदानंद, इम्तियाज अंसारी, मुख्तार मिर्जा, प्यारी सिंह, सुधीर सिंह, विष्णुपुरी, कलाम अंसारी,  महबूब अंसारी, सुखदेव सिंह समेत दोनों समुदाय के लोग शामिल है।

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