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एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड में दो नक्सलियों को मिली फांसी की सजा


दुमका।

दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की विशेष अदालत ने बुधवार को तत्कालीन पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार के अलावा 5 पुलिस कर्मियों की हत्या मामले में प्रवीर दा उर्फ सुखलाल मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला दा को फांसी की सजा सुनाई है। 

इस केस में गिरफ्तार पांच अभियुक्तों- वकील हेम्ब्रम, लोबीन मुर्मू, सत्तन बेसरा, मारबेल मुर्मू और मारबेल मुर्मू-2 को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने 6 सितंबर को बरी कर दिया था।

इस कांड को लेकर भादवि की धारा 147, 148, 149, 326, 307, 379, 302, 427, 27 शस्त्र अधिनियम और 17 सीएलए के तहत प्रवील दा, ताला दा, दाउद, जोसेफ और 25 से 30 अज्ञात के खिलाफ कांड सं. 55/13 के तहत काठीकुंड थाने में मामला दर्ज किया गया था। इस केश में सात अभियुक्तों का ट्रायल चला जिसमें प्रवील दा उर्फ सुखलाल मुर्मू, वकील हेम्ब्रम, मारबेल मुम, मारबेल मुर्मू-2, सत्तन बेसरा, सनातन बास्की उर्फ ताला दा शामिल है। हत्याकांड में कुल 31 गवाहों का बयान कोर्ट में दर्ज किया गया। 

इस केस में बुधवार को पहले सजा के बिंदु पर बहस हुई जिसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजा खान, और केएन गोस्वामी ने कम सजा देने की अपील की जबकि अभियोजन की ओर से एपीपी ने इसे रेयरेस्ट आँफ दि रेयर केस बताते हुए कुछ केसों का हवाला देते हुए फांसी की सजा देने को न्यायोचित बताया। कोर्ट ने कहा कि जब एक आईपीएस अधिकारी की हत्या की गयी तब आम आदमी की सुरक्षा कैसे होगी। इसलिए दोनों को फांसी की सजा सुनाई जाती है।

2 जुलाई 2013 की है घटना:

ज्ञात हो कि 2 जुलाई 2013 को दुमका में डीआईजी कार्यालय में बैठक के बाद एसपी अमरजीत बलिहार दो वाहनों से पाकुड़ लौट रहे थे। तभी घात लगाए काठीकुंड के आमतल्ला के पास पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार के काफिले पर नक्सलियों ने एके 47, इंसास रायफल और एएसएलआर से ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी। इसमें एसपी अमरजीत बलिहार के अलावा 5 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। नक्सली हमले में शहीद पुलिस जवान मनोज हेम्ब्रम दुमका जिले के गुहियाजोरी गांव, राजीव कुमार शर्मा और संतोष मंडल साहेबगंज जिला, अशोक कुमार श्रीवास्तव बिहार के बक्सर जिला और चंदन थापा बिहार के कटिहार जिले का रहनेवाले थे। नक्सली हमले में एसपी समेत कुल 6 जवान शहीद हुए थे और दो एके 47 रायफल, चार इंसास रायफल के अलावा दो पिस्टल और 647 गोलियां नक्सली अपने साथ लेते गए थे।

2003 बैच के आईपीएस थे बलिहार:

अमरजीत बलिहार 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। वे झारखंड आर्म्ड पुलिस के कमांडेंट रह चुके थे। उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ काफी कड़े कदम उठाए थे। इसी वजह से पाकुड़ में पोस्टिंग के समय से ही वे नक्सलियों के निशाने पर थे।

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