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बेनूर जिन्दजी में नूर भरने की कवायद, नेत्रहीन शिक्षक दे रहे नेत्रहीन बच्चों को शिक्षा

Reported by: आशुतोष श्रीवास्तव 

गिरिडीह।

झंझावातों के बीच एक दीप जलाकर ज्ञान की रौशनी दिखाने वाले शिक्षकों को आज पूरे देश में नमन किया जा रहा है।आईये शिक्षक दिवस के इस खास मौके पर कुछ कुछ ऐसे ही शिक्षकों से रूबरू होते हैं जो बेनूर जिंदगी में नूर भरने का काम कर रहें हैं।

तमसो माँ ज्योतिर्गमय के संदेश का वाहक बनकर चार नेत्रहीन शिक्षक बेनूर ज़िन्दगी में नूर भर रहें हैं। कुल 50 नेत्रहीन और 43 मूकबधिर छात्र-छात्राओं की जिन्दजी में रौशनी की बौछार इन्ही के बदौलत हो रही है। जी हाँ, गिरिडीह के अजीडीह में संचालित नेत्रहीन विद्यालय में सालों से नेत्रहीन शिक्षक विजय कुमार,राजेश पॉल, शिवशंकर मांझी एवं महिला शिक्षिका रिंकू सरकार,मूकबधिर व नेत्रहीन बच्चों को ब्रेल व अन्य लिपि में शिक्षा देते हैं।

गौरतलब है कि इस विद्यालय के कई बच्चों ने इन्ही शिक्षकों से ज्ञान अर्जित कर ख्याति अर्जित की है। कई बच्चे बेहतर रिजल्ट करते हुवे जिले व राज्य स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं।यहां पठन- पाठन कर रहे बच्चों के मन में इन शिक्षकों के प्रति अगाध श्रद्धा और आस्था है।बच्चों का कहना है कि उन्हें चारों शिक्षक खूब मेहनत और लगन से पढ़ाते हैं।       

इधर विद्यालय के प्रिंसिपल मुकेश प्रसाद का कहना है कि विद्यालय में कुल 5 शिक्षक हैं. जन्म से चार शिक्षक नेत्रहीन हैं और ये दिव्यांग बच्चों के मर्म को खूब बेहतर ढंग से समझते हैं।

अब जरा इन  शिक्षकों की भी सुन लेते हैं। इनका कहना है कि वे स्वयं दिव्यांग हैं। इस वजह से उन्हें बच्चों के जरूरतों की जानकारी औरों से ज्यादा है। इनका कहना है कि ये बच्चें खूब तरक्की करें इन्हीं भावनाओं के साथ वे समर्पित हो कर शिक्षा दान दे रहें हैं।  

बहरहाल, इन शिक्षक की लगन और मेहनत को देखकर सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं, धुआं बनकर पर्वतों से उड़ा करते हैं, हमें क्या रोकेंगे ये ज़माने वाले, हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते है. 

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