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पाकुड़ में कभी भी हो सकता है झरिया जैसा हादसा!

रिपोर्ट: जितेंद्र दास 

पाकुड़:

पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र के सिमलोंग कोलयरी के खुले भूमिगत कोयला खदान में लगी आग को प्रबंधन द्वारा अभी तक बुझाने का कोई पहल नही किया गया है। पिछले एक महीनों से कोयले में सुलग रही आग ने एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है।

कोयला खदान में लगी आग से ग्रामीणों में भय का माहौल व्याप्त है। तेज धूप और गर्मी के कारण भूमिगत कोयला में आग लगने की कारण बताया जा रहा परंतु कोयलरी प्रबंधक द्वारा आग को बुझाने में कोई पहल नही किया जा रहा है। सिमलोंग कोलयरी के आसपास के गांव जापानी सिमलोंग घघरी के ग्रामीणों ने बताया कोयला के खुले खदान होने के कारण भूमिगत कोयला में पिछले एक महीनों से भी अधिक समय से आग लगा हुआ है। प्रबंधक को ग्रामीणों द्वारा कई बार इसकी जानकारी दी गई पर प्रबंधक इससे गंभीरता से नही लिया।

आग दिन व दिन बढ़ते जा रहा है । ग्रामीणों की माने तो कोयला में लगी आग काफी अंदर तक चला गया है जिससे बुझाना अब एक चुनौती से कम नही होगा।

ईसीएल सिमलोंग कोलयरी के भूमिगत कोयले में आग लगने से आस पास के ग्रामीणों में भय का माहौल है । सबसे ज्यादा भयभीत जापानी गांव के ग्रामीण है । जापानी गांव आग लगे स्थल से सबसे नजदीक है । ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के अंदर कोयला जल जाने से ऊपरी हिस्सा कभी भी नीचे खिसक सकता है ।और लोगो  को झरिया जैसे दुर्घटनाओ का सामना करना पड़ेगा । ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रबंधक और प्रशासन इस पर पहल नही करती है तो ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।

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