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अतिक्रमित भूमि को खाली कराने गये वनकर्मियों पर हमला, कई चोटिल, ग्रामीणों ने कहा जायें कहां


देवघर/जसीडीहः 

जसीडीह थाना क्षेत्र के पांचुकुरा गांव में अतिक्रमित ज़मीन को खाली कराने गयी वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध व हमले का सामना करना पड़ा. हमले में दो वनकर्मी ज़ख्मी हुए तो कईयों को चोटें भी आईं.

दरअसल, पांचुकुरा मौजा के प्लाॅट संख्या 170 के अतिक्रमित वनभूमि को खाली कराने वन विभाग की टीम गयी थी. गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण कर घर बना रह रहे लोगों को जब वन विभाग की टीम हटाने गई तो ग्रामीणों द्वारा वन कर्मी और पुलिस पदाधिकारीयों पर पत्थरबाज़ी की गई. जिसमें दो रेंजर आॅफिसर बूरी तरह घायल हो गये और दर्जनों पुलिस कर्मी सहित देवघर सीओ को भी हल्की चोटें आई है. 

पत्थरबाज़ी में कई चोटिलः 

जानकारी के मुताबिक वन भूमि पर अवैध रूप से मकान बनाकर रह रहे लोगों को कई बार ज़मीन खाली करने का नोटिस भेजा गया था. लेकिन ग्रामीणों ने वन विभाग की ज़मीन को खाली नहीं किया था. जिसके बाद विभाग के निर्देश पर गुरूवार को वन कर्मी पुलिस पदाधिकारी के साथ वहां पहुंचे और ग्रामीणों को जमीन खाली करने को कहा गया. लेकिन ग्रामीणों ने उनकी एक न सुनी. वन कर्मी अवैध रूप से बने मकानों पर जेसीबी चलाने लगे तो ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर वनकर्मियों पर पत्थरबाजी़ कर दी. जिसमें दो रेंजर आॅफिसर बूरी तरह से घायल हो गये. आनन-फानन में दोनों घायलों को सदर अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका ईलाज हुआ.

दोबारा गांव पहुंची टीमः 

वहीं, पत्थरबाज़ी के बाद घायल वन कर्मियों को लेकर विभागिय टीम गांव से देवघर अस्पताल लौटी. घायलों के इलाज के बाद पुख्ता इंतजाम के साथ टीम एक बार फिर पाचुकूड़ा गांव पहुंची. और अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया. 

ग्रामीणों ने कहा, सालों से रह रहे अब कहां जायेंः 

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि वनकर्मी जबरन घर खाली करा रहे हैं. आरोप है कि मना करने पर वन कर्मीयों ने एक घर के बाहर चैपाल को जला दिया और महिलाओं क साथ मारपीट की. ग्रामीण महिलाओं का कहना है अगर वे वन भूमि पर अवैध मकान बनाकर रह रहे हैं तो सरकार ने उन्हें पहले से बिजली, पानी और सड़क जैसी सारी सुविधाऐं मुहैया क्यों करा चुकी है. उन्हें यहां से जबरन निकाला जा रहा है तो अब इतने सालों से यहां रहने के बाद वे कहां जाएंगे. 

सरकार से आशियाने की मांगः 

ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार उनके घर को जबरन खाली न कराएं, अगर फिर भी सरकार ऐसा करती है तो उन्हें बेघर करने से पहले ग्रामीणों के रहने के लिए एक उचित जगह मुहैया कराई जाए. 

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