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घर में होता शौचालय तो नहीं जाती छात्रा की जान, हादसे ने सामने लायी ओडीएफ की सच्चाई

रिपोर्ट: प्रदीप रमानी 

देवघर/सारवां:

घर में होता शौचालय तो शायद नहीं जाती छात्रा की जान….

देवघर जिले को ओडीएफ यानि आउटडोर डेफिकेशन फ्री कर दिया गया है. देवघर जिले में सारवां प्रखंड को तो कई माह पहले ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है. लेकिन सोमवार को सारवां में घटी दर्दनाक घटना ने ओडीएफ की खोखली सच्चाई को सामने ला दी. 

युवती के साथ हुआ दर्दनाक हादसाः 

घटना सारवां थाना क्षेत्र के दलीरायडीह गांव की है. जहां की रहने वाली एक छात्रा की अर्द्धनग्न और पत्थर से कुचली हुई खून से लथपथ लाश घोरपलास के जंगल से झाड़ियों के बीच बरामद की गयी. आशंका है कि पहले दुष्कर्म के बाद युवती की दर्दनाक हत्या की गयी है. हालांकि इसकी पुष्टी पोस्टमार्टम रिपोर्ट करेगी. लेकिन… सवाल यह है कि युवती शौच के लिए बाहर गयी थी. तभी इसके साथ ये दर्दनाक हादसा हुआ. 

ओडीएफ का दावा सवालों के घेरे मेंः 

ओडीएफ के दावे को युवती के साथ हुए हादसे ने खोखला साबित कर दिया है. मृतका छात्रा के पिता कहते है कि उनकी बेटी शौच के लिए सुबह घर से झाड़ियों की तरफ गयी थी. जहां से वापस नहीं लौटी. पिता द्वारा दिये गये लिखित आवेदन के आधार पर अज्ञात के खिलाफ सारवां थाने में कांड दर्ज किया गया है. आवेदन में लिखा गया है कि छात्रा शौच के लिये गई थी. इसी क्रम में उनके साथ अप्रिय घटना घटना के बाद उसकी निर्मम हत्या किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा कर दी गई. हालांकि घटना के तीन दिन बित चुके हैं और पुलिस के हाथ खाली ही हैं. न जाने कब इस बच्ची को इंसाफ मिलेगा. 

गांव में नहीं बना है एक भी शौचालय!:

घटना के बाद सवाल यह उठ रहे कि जहां सरकार द्वारा प्रखंड क्या.. पूरे जिले को ओडिएफ घोषित किया जा चुका है तो फिर मृतका के घर में शौचालय क्यों नहीं बना. हो सकता है निर्माण कार्य में कोई गड़बड़ी रही है. लेकिन कारण जो भी हो इसका खुलासा अधिकारी भी करने से कतरा रहे हैं. इस घटना के बाद कई पहलु चैंकाने वाले सामने आये हैं. सिर्फ मृतका के घर में ही नहीं बल्कि जिस गांव में छात्रा रहती थी वहां ज्यादातर घरों में शौचालय का निर्माण हुआ ही नहीं है. और हुआ भी है तो एक्का-दुक्का. ये बातें खुद ग्रामीणों ने कही. यहां तक की गांव की जलसहिया ने भी कहा कि उनकी जानकारी में इस गांव में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है. 

अब बाहर शौच जाने से लगता है डरः 

गांव की महिलाओं का कहना है कि पूरे गांव में सभी शौच के लिए बाहर घोरपरास जंगल की ओर जाती हैं. महिलाएं कहती हैं कि पहले उन्हें बाहर जाने पर जानवरों का डर सताता था लेकिन अब तो इंसानी रूप में बैठे हैवानों से भी डर लगने लगा है. ग्रामीणों की बात और इस घटना ने एक गंभीर सच को सामने लाया है. एक ओर जहां मासूम छात्रा के साथ कुकर्म करने वालों को पकड़ कड़ी सजा देने की जरूरत हैं तो वहीं शौचालय निर्माण के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाने वालों को भी गिरफ्त में लेने की जरूरत है. 

बाहर शौच जाना मजबूरीः 

मिली जानकारी के अनुसार गांव में कुल 48 परिवार रहते हैं. गांव की आबादी चार सौ है. ज्यादातर लोग खेती और पशुपालन से जुडे़ हुये है. आर्थिक रूप से मजबूत न होने के कारण घरों में शौचालय का निर्माण नहीं करा सकते. ऐसे में सरकारी योजनाओं के लाभ मिलने की उम्मीद थी. लेकिन सरकारी बाबुओं ने कागज पर वाहवाही लूटने के लिए पूरे प्रखंड को ही ओडीएफ घोषित करा दिया. जबकि प्रखंड के इस गांव की मां, बेटियां, बुढ़े, बच्चे और पुरूष सभी शौच के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं. 

क्या कहते हैं बीडीओ: 

वहीं, जब इस सबंध में सारवां बीडीओ बिजय कुमार से जानकारी मांगी गई तो सबसे पहले सही से जानकारी नहीं दे पाये. फिर कहा कि उन्हें फाईल देखनी होगी. रही बात दलीरायडीह की तो वहां शौचालय का निर्माण नहीं होना, यह जांच का विषय है.

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