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भोजपुरी फिल्म ‘काहे गईले विदेशवा कमाये’ में सारठ का दिवाकर बना विलेन

रिपोर्ट: शिव कुमार यादव 

देवघर/सारठ: 

कहते है कि दिल में कुछ कर गुजरने की जिद हो तो बड़े से बड़े मंजील को भी हासील किया जा सकता है और इसे सच कर दिखाया है सारठ प्रखंड के अलुवारा पंचायत के लखना गांव निवासी दिवाकर तिवारी ने।

आज अपनी लगन व मेहनत के बदौलत दिवाकर मायानगरी मुंबई में रहकर भोजपुरी फिल्म में बतौर मुख्य खलनायक की भूमिका बखूबी अदा कर क्षेत्र का नाम रौशन कर रहे हैं। भोजपुरी फिल्म काहे गईले विदेशवा कमाये में दिवाकर तिवारी मुख्य खलनायक लाला की भूमिका में है। इसके पहले देवरा सुपर स्टार फिल्म में भी दिवाकर ने मुख्य खलनायक की भूमिका निभाई है। जिसमें उनके एक्टिंग की खूब प्रशंसा की गई है।

तिवारी

फिल्म की शूटिंग मध्यप्रदेश में हो चुकी है। वहीं मुम्बई में भी शूटिंग चल रहा है। फिल्म में मुख्य कलाकार गोपालगंज के नागेन्द्र उजाला व मुम्बई की स्वेता मिश्रा, जिया मंसुरी व प्रमोद शुक्ला है। फिल्म के निर्देशक अनील एस मेहता है। फिल्म में साधना सरगम, सुरेश वाडेकर, कल्पना आदि ने कई गाने गाये है।

सितंबर-अक्टुबर तक फिल्म पर्दे पर आयेगी। इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक गांव का लड़का आर्थिक तंगी से उब कर मुम्बई कमाने जाता है। लेकिन इसी बीच उनकी मुलाकात एक मेम साहब से हो जाती है। युवक मेम साहब के चक्कर में घर की परेशानी को भुल जाता है और मुम्बई में ऐशो आराम से रहने लगता है। वहीं उनके घर में पत्नी व बच्चें इस आस में लाला से उधार ले रहे है कि पति कमा कर आयेगा तो कर्जा चुका देंगे। लेकिन जब काफी दिनों बाद भी युवक वापस नहीं लौटता है और न ही कोई खबर आता है जिससे घर वाले परेशान हो जाते है। वहीं लाला कर्ज के एवज में परिवार को घर से निकाल देता है। 

गोविन्दा की फिल्म स्वर्ग से मिली प्रेरणा:

दिवाकर तिवारी ने बताया कि उनका परिवार भी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। बचपन में जब छह कक्षा में पढ़ रहे थे उसी समय गोविन्दा की फिल्म स्वर्ग देखे थे जिसमें गोविन्दा मजदूर से हीरो बन जाता है। उनके अंदर भी जुनून था कि क्या वे ऐसा नहीं कर सकते है। लेकिन बचपन से ही स्कूल व गांव घरों में गाना व एक्टिंग करते थे। इसी बीच मैट्रीक पास करने के बाद 18 साल की उम्र में ही घर छोड़ कर दिल्ली काम करने चले गये। करीब छह वर्ष दिल्ली में काम करने के बार खुद का ट्रांस्पोटिंग कंपनी खोल लिए। जब कुछ पैसा जमा हो गया तो दिल की ख्वाहीश पुरी करने के लिये मायानगरी मुम्बई चले गये। दिवाकर तिवारी ने बताया वहां पायल कश्यप से उनकी मुलाकात हुई। और उन्हीं के बदौलत आज फिल्म में काम कर रहे है। कई भोजपुरी फिल्मों में काम मिला है। उनका एक ही सपना है कि बड़े कलाकार बनकर जरूरत मंदों की सेवा कर सकुं जिससे क्षेत्र का नाम रौशन हो। 

 

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