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सरकारी तंत्र पर सवालिया निशान, आर्थिक तंगी ने ली सावित्री देवी की जान!

 

रिपोर्ट: आशुतोष श्रीवास्तव 

 गिरिडीह: 

झारखण्ड ने तरक्की की राह पर लम्बा सफर तय करना शुरू कर दिया है. लेकिन लोगो के भूख को मिटाने में अब तक कामयाबी नहीं मिली है. दो वक़्त की रोटी से महरूम लोगो की तादाद में कमी नहीं आयी है. गिरिडीह के सेवाटांड़ की बुधनी का मामला अभी शांत ही नहीं हुआ था कि ताज़ा मामला मधुबन के सावित्री देवी का आ गया. विकास की तेज रफ़्तार ने सावित्री जैसी गरीब पर कोई भूमिका नहीं निभाई और आर्थिक तंगी से सावित्री ने दम तोड़ दिया।

जिंदगी की दौड़ में इंसान को दो वक़्त की रोटी कमाने के लिए दिन भर जूझना पड़ता है लेकिन जिनकी जिंदगी किस्मत की लकीर सरकारी सिस्टम पर टिका हो तो क्या कहेगे ? जी हाँ विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन और डुमरी के सीमांकन पर स्थित एक छोटे से गांव मंगरगद्दी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिससे सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़ा हो रहा है. कहा जा रहा है कि यहाँ 40 वर्षीय सावित्री देवी की मौत भूख से हो गयी. घर में आधार कार्ड रहने के बावजूद सावित्री का राशन कार्ड नहीं बना था. जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सावित्री के सारे दस्तावेजों को ऑनलाइन डाटा इंट्री करा दिया था बावजूद इसके प्रखंड आपूर्ति विभाग की सरकारी सिस्टम सावित्री की मौत का कारण बन गया. 

सावित्री के घर वालो की माने तो घर में अनाज नहीं था. बताया जाता है सावित्री ने पिछले दो महीना पहले ही राशन कार्ड बनाने के सभी अहर्ता को पूरा कर विभाग को दे दिया था. कार्ड को लेकर वह लगातार डुमरी प्रखंड कार्यलय का चक्कर काटा करती थी. लेकिन सरकारी बाबू की लालफीताशाही से सावित्री का कार्ड नहीं बन सका. डुमरी प्रखंड प्रमुख यशोदा देवी की माने तो इसके लिए सरकारी तंत्र  दोषी है. 

सावित्री की मौत के बाद मामले को रफा-दफा करने का पूरा प्रयास किया गया. स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियो की टीम ने सावित्री के घर जाकर स्थिति का जायजा लिया। बीडीओ ने यहाँ तक कह दिया कि सावित्री की मौत सामान्य है. भूख से सावित्री की मौत नहीं हुई है लिहाजा शव का पोस्टमार्टम नहीं होगा। 

सावित्री की मौत होने की खबर मिलते ही प्रखंड आपूर्ति विभाग के अधिकारियो का होश उड़ गया. आनन फानन में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी शीतल प्रसाद मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। शीतल प्रसाद ने स्वीकार किया कि सावित्री की मौत आर्थिक तंगी से हुई है. अगर उन्हें पता रहता तो वह अपने स्तर से अनाज उपलब्ध करा देते। उन्होंने कहा कि सावित्री की मौत के लिए जिम्मेवार स्थानीय डीलर है. डीलर को अधिकार दिया गया है कि विशेष परिस्थिति में वह अनाज दे सकता है. 

इधर सावित्री की मौत की खबर मिलते ही डुमरी विधायक जगरनाथ महतो तुरंत मौके पर पहुंचे और दोषी अधिकारियो पर कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि आगामी 15 जून के मानसून सत्र में वह इस  मामले को विधानसभा के पटल पर प्रमुखता से उठाएंगे। 

बहरहाल सरकारी सिस्टम की लकीरे ने एक माँ को छीन लिया। सावित्री का दोष सिर्फ इतना था कि जिंदगी व किस्मत की लकीर सरकारी सिस्टम पर टिकी थी. ऐसे सवाल यह उठता है कि सावित्री जैसी कई गरीब जिसका ऑनलाइन डाटा इंट्री हो चूका है बावजूद राशन कार्ड नहीं बन पाया है क्या सावित्री की तरह उनकी भी किस्मत की लकीर सरकारी सिस्टम पर टिकी रहेगी। या सरकार पुरे मामले की जाँच कर आगे ऐसा न हो उसपर सिस्टम को मज़बूत बनाएगी। 

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