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बेइंतहा दर्द के बाद अब मदद की बाट जोह रहा है शहीद का परिवार

रिपोर्ट: आशुतोष श्रीवास्तव 

गिरिडीह:

देश की आंतरिक सुरक्षा करते-करते शहीद होने वाले जवानों के आश्रितों को खूब मान-सम्मान मिलता है। बड़े-बड़े मंचो से उनके कल्याण के लिए वादे किए जाते हैं। लेकिन उन वादों की जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है। गिरिडीह के लाल सीताराम उपाध्याय सरहद पर दुश्मनों से लोहा लेते-लेते शहीद हो गया पर शहादत के तीन दिन बाद भी जिले के प्रशासनिक महकमा ने मुआवजा दिलाने के नाम पर सुध नहीं लिया। 
 
सरहद पर शहीद हुवे बीएसएफ जवान सीताराम उपाध्याय के परिवार में फिलवक्त आक्रोश है और नम आंखों के साथ जज्बात भी सुलग रहे हैं। गिरिडीह समेत पूरा झारखंड जहां शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा है, वहीं पाकिस्तान के नापाक इरादों के खि‍लाफ लोगों में भारी गुस्सा भी है। हजारों हजार लोग शहीदों की अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। लेकिन बेइंतिहा दर्द झेल रहे शहीद के परिवार को अब भविष्य की चिंता खाए जा रही है। दो छोटे-छोटे बच्चे इस भयावह त्रासदी से बेखबर अपने पापा की तस्वीर लिए बेपरवाही से घूमता फिरता है। शहीद की बेवा यह सब देख सुबकती रहती है। इनका कहना है कि इन्हें आश्वासन तो बहुत मिला है लेकिन अब तक कोई सहायता कहीं से भी उपलब्ध नही हो पाई है। 
 
घर का इकलौता कमाऊ सदस्य के अनायास ही चले जाने से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के अन्य सदस्यों का भी बुरा हाल है। शहीद की माता व बड़े भाई भी अब बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।
 
इधर पालगंज के लाल की शहादत पर पूरा इलाका मर्माहत है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि लगातार शहीद के परिवार का दुख दर्द बांट रहें हैं। इलाके के भाजपा नेता सह प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष शरद भक्त का कहना है कि शहीद के परिवार को मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन ने मदद का भरोसा दिलाया है। लेकिन कागजी रूप में अब तक कोई भी प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि मुआवजे की प्रक्रिया जल्दी शुरू करें ताकी शहीद का परिवार इस बड़े दुख से उबर सके।
 
 पालगंज के लाल सीताराम उपाध्याय की शहादत पर पूरा गिरिडीह इलाका मर्माहत है. घटना के दिन और अंतिम यात्रा के दिन भी गिरिडीह विधायक निर्भय शाहाबादी शहीद परिवार के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़े रहे. सीताराम के शहादत को भुलाया नहीं जा सकता इसलिए पालगंज मोड़ पर एक भव्य तोरण द्वारा समेत शहीद स्मारक और डिग्री खोला जायेगा। जिसका नाम शहीद सीताराम उपाध्याय डिग्री कॉलेज रहेगा जबकि सूबे के मुखिया द्वारा 10 लाख रूपए और 5 एकड़ भूखंड देने की घोषणा की गयी है. 
                      
बहरहाल,देश की आंतरिक सुरक्षा में लगकर शहीद हुवे कई जवानों  के परिवारों की दशा बदहाल है। वादे तो बड़े बड़े होते हैं लेकिन उन घोषणाओं को अमली तौर पर लागू होने की गति बड़ी धीमी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या शहीद सीताराम के परिवार को वक्त रहते जरूरी सहायता मिल पाएगी? इस सवाल पर सभी को मंथन करने की दरकार है। 

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