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शहीद सीताराम की अंतिम यात्रा में उमड़ा हुजूम, नम आंखों से दी गयी अंतिम विदाई

रिपोर्ट: आशुतोष श्रीवास्तव 

गिरिडीह:  

हाथों में तिरंगा लहरा रहा था। गम और गुस्सा यहां की फिजाओं में तैर रहा था। नम आंखों से लोग शहीद जवान की एक झलक पाने को व्याकुल थे। डुमरी से लेकर मधुबन होते हुए पालगंज तक हजारों लोग शहीद सीताराम उपाध्याय को श्रद्धांजलि देने के लिए पलक पावड़े बिछाएं खड़े थे।
असल में जब से यहां यह खबर आई थी कि गिरिडीह का लाल सीताराम देश की रक्षा में कश्मीर की सरहद पर शहीद हो गया है तभी से सभी अपने वीर सपूत का इंतजार कर रहे थे।
सिजफायर के बावजूद पाकिस्तान की नापाक हरक़तों ने झारखण्ड के लाल को छीन लिया। शनिवार को सीमा सुरक्षा बल की टीम जवान के शव को राजकीय सम्मान के साथ लेकर मधुबन पहुँची। यहां लगातार शहीद के सम्मान में अमर रहे के नारे गूंज रहे थे। वही पाकिस्तान मुर्दाबाद की गूंज भी सुनाई पड़ रही थी।
पाकिस्तान के इस हरकत पर लोगों में गुस्सा भी दिख रहा था। मधुबन से शहीद के शव को शोभा यात्रा निकाल कर पालगंज ले जाया गया। जहां राजकिय सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी गयी. 
मौके पर सांसद रविंद्र पांडेय, गिरिडीह विधायक निर्भय शाहाबादी और पूर्व आईजी लक्ष्मण सिंह ने कहा कि सीताराम की कुर्बानी जाया नहीं जाएगी। दुश्मन मुल्क को इसकी कीमत चुकानी होगी। लोगों ने शहीद के परिजनों को सहायता देने की मांग भी सरकार से की।

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