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पालगंज का लाल सीमा पर शहीद, गांव में पसरा सन्नाटा

रिपोर्ट: आशुतोष श्रीवास्तव 

 

 गिरिडीह:   

पड़ोसी मुल्क की मक्कारी ने गिरिडीह के एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों में जहर घोल दिया है। सीज फायर के बाद भी पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में भारतीय सरहद पर गोली बारी की गई। इस कायराना कार्रवाई में गिरिडीह के पालगंज का लाल शहीद हो गया. शहीद का परिवार निहायत ही गरीब है. 

देश के लिए कुर्बान हुए एक रणबाँकुरे की बेवा बदहवासी के आलम में है। महज सात साल पहले ब्याह कर आई इस अभागन को क्या पता था कि सरहद पर उसके मांग का सिंदूर पड़ोसी मुल्क की मक्कारी से उजड़ जाएगा। सीज फायर के बाद भी पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में भारतीय सरहद पर गोली बारी की गई। इस कायराना कार्रवाई में गिरिडीह के पालगंज का लाल शहीद हो गया।

पालगंज निवासी निःशक्त ब्रजनंदन उपाध्याय का पुत्र सीताराम उपाध्याय बीएसएफ में बतौर जवान कश्मीर के आरएस पूरा सेक्टर में तैनात था। निहायत ही गरीब परिवार का वह  इकलौता कमाऊ सहारा आज अपने देश की रक्षा में कुर्बान हो गया है। देश के लिए कुर्बान होने वाले शहीद जवान सीताराम उपाध्याय के पिता और चाचा गौरवान्वित महसूस कर रहे है. उन्हें नाज है कि उनका लाल माता की रक्षा करने के लिए शहीद हो गया लेकिन उन्हें इस बात की मलाल है कि भारत सरकार द्वारा पड़ोसी मुल्क पर कोई बड़ा कदम नहीं उठा रहा है. 

झारखण्ड के लाल सीताराम उपाध्याय की शहादत की खबर जब गांव में पहुची, तब से पूरा इलाका शोकाकुल है। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। शहीद की माता और पत्नी का रो रोकर बुरा हाल है. शहीद की माँ किरण देवी कहतीं हैं कि उसने भीख मांग मांग कर अपने दो बच्चों को पाला है। बड़ा बेटा मधुबन के एक मंदिर में पुजारी है। छोटा बेटा जब बीएसएफ में भर्ती हुआ तो उम्मीद जगी कि अब परिवार की दशा सुधर जाएगी। लेकिन कुछ ही बरस में हमारी दुनिया उजड़ जाएगी ये कभी सोचा नहीं था। उन्हें गर्व है वह देश के लिए कुर्बान हुआ है.

इधर सीताराम उपाध्याय के शहीद होने की खबर मिलते ही पालगंज में मातम का माहौल छा गया है. शोकगुल परिवार को ढाढ़स बँधाने के लिए लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा. लोगो में आक्रोश इस बात को लेकर है कि पाकिस्तान ने धोखे से उनके लाल को मारा है। भारत सरकार पाकिस्तान पर सख़्त कार्रवाई करे साथ ही शहीद का एक स्मारक भी बनाना चाहिए। 

बहरहाल, शहीद सीताराम उपाध्याय का पार्थिव शरीर देर रात को पालगंज पहुंचेगी और शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकालकर उनके पार्थिव शरीर को पंचतत्व में विलीन कर दिया जायेगा। लेकिन सवाल यही उठता है कि कब तक देश के वीर जवान पाकिस्तान के नापाक हरकतों का शिकार होता रहेगे। 

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