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ग्रामीणों का टूटा सब्र, विरोध के आगे लौटी केंद्रीय टीम

रिपोर्ट: आशुतोष श्रीवास्तव 

गिरिडीह: 

दिल्ली से आने वाली केंद्रीय टीम को लेकर ग्रामीणों के आखों में उम्मीद की एक किरण फूटी थी। इन्हें लगा था केंद्रीय टीम आएगी तो विकास योजनाओं की समीक्षा होगी। इनकी समस्याएं दूर होगी। लेकिन केंद्रीय जांच टीम सिर्फ कागजी खाना पूर्ति के लिए आई थी। अधिकारी इनकी समस्याओं को न सुन कर सिर्फ अपनी बातों को इनपर थोप रहे थे। आखिरकार ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया।अचानक ग्रामीण भड़क उठे और टीम अधूरी मीटिंग को छोड़ कर भागने को मजबूर हो गयी. 

पहाड़पुर

यह मामला है धनवार प्रखंड के पहाड़पुर गांव का। असल में 900 लोगों की आबादी वाले सापामारण पंचायत के पहाड़पुर बस्ती में पेयजल की घोर किल्लत है। कुल 7 में से 3 चापानल चालू है। वही बिजली की हालात भी बहुत खराब है। पगडंडी वाली सड़के, अधूरे शौचालय, नाकाम उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना का हाल बुरा, आधे से ज्यादा लोगों के पास बैंक खाता भी नही। यानी तमाम सरकारी योजनायें यहां पहुँचते-पहुँचते रास्ता भटक चुकी है। ऐसे में जब केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा को लेकर भारत सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी निकोलस कुजूर के नेतृत्व में टीम पहुँची तो बड़ी उम्मीद के साथ ग्रामीण महिला पुरुषों ने इस टीम का स्वागत किया। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि केंद्र से पहुँची टीम गाँव की गलियों में घूम कर विकास कार्यों की समीक्षा करेगी। पर नेताओं की तरह सिर्फ कागजी बातों को यहां सुनाया जाने लगा जो इससे पूर्व कई बार प्रखण्ड के पदाधिकारियों के द्वारा पहले भी सुनाया जा चुका था। जिससे नाराज ग्रमीणों ने केंद्र से आये पदाधिकारियों के समक्ष अपने गाँव की कई समस्याओं को रखा। जिसमे प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी अनियमितता की बातें कही गई। साथ ही प्रधानमंत्री उज्वला योजना में भी गैस मुहैया नही करवाने की चर्चा हुई। जबकी कई योजनाओं को धरातल पर नही आने के कारण उस योजना का नाम तक नही जानने की बात ग्रामीणों ने केंद्रीय टीम के समक्ष रखी।

यहाँ कई ग्रामीणों ने शौचालय निर्माण में गड़बड़ी तथा बिजली की समस्या से टीम को अवगत कराया गया। इस दौरान अपनी गलती देख सम्बंधित  विभाग के पदाधिकारी ग्रामीणों पर भड़क गए। फिर क्या था.. ग्रामीणों का आक्रोश फूटा और नाराज ग्रामीण उठ खड़े हुवे। मौके पर केंद्रीय टीम को भी ग्रामीणों का कोप भाजन होना पड़ा। ग्रामीण केंद्रीय टीम पर भी सवाल खड़े कर रहे थे।

 

 बताया गया कि दिल्ली से राजधनवार के पहाड़पुर जैसे पिछड़े ग्राम तक आकर टीम सही रूप से समीक्षा नही कर रही। ग्रामीणों के सवाल पर टीम कुछ भी जवाब देने से बचती हुई भाग खड़ी हुई। बाद में नाराज ग्रामीणों ने इसे मोदी सरकार के 2019 की तैयारी को लेकर इसे जोड़ रहे थे। लोगो का कहना था कि सरकार अपना महिमामंडन के लिए टीम को जगज जगह भेज रही है। ग्रामीण इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी करते दिखे। पंचायत में हो रहे समीक्षा कार्यक्रम के दौरान मुखिया उर्मिला देवी स्थल पर पहुँचना भी मुनासीब नही समझी और अपने प्रतिनिधि से ही काम चला लिया। जबकी प्रदेश सरकार द्वारा सख्त निर्देश है कि पंचायत या प्रखण्ड स्तर के बैठक में मुखिया की उपस्थिति अनिवार्य है। बावजूद सरकारी फरमान की सरासर अनदेखी की गई।

इस समीक्षा बैठक का मजाक तब और बन गया जब यहाँ समीक्षा के बजाय ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुवे भाजपा प्रखण्ड बीस सूत्री अध्यक्ष ने यहाँ भाजपा के कार्यो की चर्चा शुरू कर दी।

इस दौरान अंडर सेक्रेट्री भारत सरकार के गौतम कुमार यादव, अंचलाधिकारी धनवार शशिकांत सिंकर, जिला समन्वयक अनिल कुमार, बीससूत्री अध्यक्ष नकुल राय, प्रखण्ड पंचायती राज पदाधिकारी गौतम कुमार, प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी, विधुत आपूर्ति पदाधिकारी धनवार विकास कुमार, ग्रामीण बैंक धनवार के शाखा प्रबंधक देवनारायण राम, पंचायत मुखिया प्रतिनिधि नीलकण्ठ वर्मा सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

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