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पांच रूपये का सिक्का डाल छात्राएं निकाल पायेंगीं सेनिटरी नैपकिन

रिपोर्टः एजाज़ अहमद 

देवघर/मधुपुरः 

भारत सरकार द्वारा स्वच्छता मिशन के तहत स्कूलों में सेनिटरी नैपकीन वेडिंग मशीन और इंसीनरेटर के लगाये जाने से छात्राओं के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम किया है. अब स्कूली छात्राऐं इन मषीन का उपयोग कर सिर्फ पांच रूपये के सिक्के से ही सेनिटरी पैड निकाल पायेंगी. इसी कड़ी में मधुपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में प्रशिक्षु आईएएस सह बीडीओ कर्ण सत्यार्थी द्वारा वेडिंग मशीन और इंसीनरेटर का अधिष्ठापन किया गया. 

मशीन

करीब एक लाख की लागत वाले इन दोनों मशीन की उपयोगिता की जानकारी बालिकाओं को दी गयी. मौके पर कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि यह सरकार की बेहतर पहल है. इस दौरान 300 नैपकीन का वितरण किया गया.

प्रशिक्षु आईएएस ने कहा कि वर्तमान समय में हमारे देश में बहुत कम ही ऐसी महिलाएँ है, जो कि मेंस्ट्रुअल हाइजीन के प्रति जागरूक है. अभी भी देश के कुछ हिस्सों में महिलाएं शर्म के वजह से इस विषय पर खुलकर बात नहीं करती हैं, जिस वजह से उनमें जागरूकता का अभाव देखा जाता है और उन्हें यह पता नहीं होता कि मासिक धर्म के समय कपड़ों के वजाय सेनिटरी पैड का प्रयोग किया जाना उनके स्वास्थ्य के लिए कितना आवश्यक है. ऐसे में आवश्यक है कि लोगों के झिझक को तोड़ते हुए इस संबंध में खुलकर बात की जाय ताकि महिलाएं मासिक धर्म के समय सेनिटरी पैड का प्रयोग कर स्वयं को स्वच्छ व स्वस्थ रखते हुए अपने आस-पास के अन्य लोगों एवं आने वाली पीढ़ी जागरूक कर सकें. 

मशीन

इसके अलावे विद्यालयों में सेनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन एवं इंसीनरेटर के अधिष्ठापन के संबंध में उन्होंने कहा कि यह मशीन मासिक धर्म के दिनों में स्वास्थ्य सुरक्षा से वंचित बालिकाओं एवं मासिक धर्म के दौरान स्कूल जाने से कतराने वाली लड़कियों के लिए समर्पित है. इससे उन बालिकाओं को भी मदद मिलेगी जो नैपकीन की अनुपलब्ध्ता के कारण पूरी तरह असुरक्षित महसूस करती हैं और दुकानों से सैनेटरी पैड खरीदने में अत्यधिक संकोच करती हैं. 

विद्यालयों में इस मशीन के लगाये जाने से बालिकाएं जरूरत पड़ने पर वेंडिंग मशीन में 5 रुपये का सिक्का डालकर एक सेनिटरी पैड निकाल कर उसका उपयोग कर सकती हैं. इसी प्रकार इंसीनिरेटर के माध्यम से प्रयोग की हुई पैड का सुरक्षित निपटारा भी किया जा सकता है. इंसीनिरेटर के प्रयोग के समुचित जानकारी के अभाव में अधिकतर महिलाएँ इस्तेमाल की हुई पैड को इधर-उधर फेंक देती है. जिस वजह से कई तरह की बीमारियां फैलती है. इससे मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के अभाव में फैलने वाली बीमारियों से महिलाओं का बचाव तो होगा ही साथ ही इस्तेमाल किये हुए पैडों के समुचित प्रबंधन से स्वच्छ भारत मिशन को बल भी मिलेगा. 

मशीन

मौके पर मौजुद डीसीओ पंकज भूषण पाठक ने उपस्थित बालिकाओं व शिक्षिकाओं को मासिक धर्म स्वच्छता और मशीन के सिस्टम के बारे में बताया. पाठक ने बताया कि मेंस्ट्रुअल हाइजीन के तहत सभी विद्यालयों में यह मषीन को लगाये जायेंगे. वेडिंग मशीन के अलावा इंसीनरेटर मशीन काफी उपयोगिता साबित होगी. इसके जरिये नैपकीन पैड को चंद मिनट में ही डिस्ट्रॉय कर दिया जाता है. मशीन के लगाये जाने कस्तूरबा के बालिकाओं में काफी खुशि देखी गयी. मौके पर प्रखंड समन्वयक रशीद अंसारी सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं व सैकड़ों छात्राएं मौजूद थीं. 

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