Global Statistics

All countries
266,274,991
Confirmed
Updated on Monday, 6 December 2021, 7:34:16 pm IST 7:34 pm
All countries
238,128,478
Recovered
Updated on Monday, 6 December 2021, 7:34:16 pm IST 7:34 pm
All countries
5,273,913
Deaths
Updated on Monday, 6 December 2021, 7:34:16 pm IST 7:34 pm

Global Statistics

All countries
266,274,991
Confirmed
Updated on Monday, 6 December 2021, 7:34:16 pm IST 7:34 pm
All countries
238,128,478
Recovered
Updated on Monday, 6 December 2021, 7:34:16 pm IST 7:34 pm
All countries
5,273,913
Deaths
Updated on Monday, 6 December 2021, 7:34:16 pm IST 7:34 pm
spot_imgspot_img

कहीं देखा है ऐसा सरकारी विद्यालय…


school2:

दुमका:

सरकारी विद्यालय.. नाम सून कर ही हमारे समाज के कई लोग नाक-मुंह चढ़ाने शुरू कर देते हैं. अगर गलती से उनके बच्चों को सरकारी विद्यालय में नामांकन और पढ़ायी की बात कर दी जाये तो जैसे आसमान सर पर उठा लेते हैं. झुंझलाहट हो भी क्यों न हर कोई चाहता है कि उनका बच्चा बेहतर शिक्षा प्राप्त करे और सरकारी विद्यालयों की स्थिती किसी से छुपी नहीं है. लेकिन, दुमका के मसलिया प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय एक मिसाल पेश करता है. यह विद्यालय न सिर्फ सरकारी विद्यालयों के लिए प्रेरणादायक है बल्कि निजी विद्यालयों को मुंह चिढ़ाता भी नज़र आता है. 

school0
दुमका के मसलिया प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय तालडंगाल एक ऐसा विद्यालय है. जहां एक बार गये तो बार-बार जाने को जी चाहता है. इस विद्यालय में घूसते ही अनुशासन से लेकर स्वच्छता तक की झलक महसुस होती है. मसलिया जैसे पिछड़े इलाके में जंगल के बीचो-बीच आदिवासी बाहुल्य गांव में अवस्थित तालडंगाल सरकारी विद्यालय न सिर्फ शिक्षा में बल्कि स्वच्छता और खुबसूरती में भी बेहतरीन उदाहरण है. 

कैसे मिसाल बना विद्यालयः

विद्यालय में इस खुशनुमा वातावरण का श्रेय पूर्व सह सेवानिवृत शिक्षक बलराम राय को जाता है. साल 2000 के पूर्व विद्यालय का बेहतर भवन नहीं था. खंडहर व वीरान पड़े मौजूदा स्थल में किसी तरह विद्यालय का संचालन होता था. जहां छात्रों की संख्या न के बराबर होती थी. लेकिन, जब यहां शिक्षक बलराम राय की नियुक्ति हुई तो उन्होंने इस विद्यालय को सर्वोतम बनाने की सोची. उनके प्रयास से विद्यालय में स्वच्छता और हरियाली आज देखते ही बनती है. विद्यालय के हर कमरा, दिवारें, फ्लोर और पूरा परिसर चमचमाता नज़र आता है. 

school3school4

विद्यालय परिसर में चीकू, बेल, सागवान, शीशम, साल, अनार, आम, कटहल, बोच, जामुन, अमरूद, केला, आकंद, अशोक, कपास पेड़ के अलावे फुल और औषधीय पौधें लगाये गये हैं. यह पौधे शिक्षकों व बच्चों ने लगाए हैं. हर पौधे की पहचान के लिए उसका नाम भी पेड़ पर लिखकर टांग दिया गया है. ताकि बच्चे भी सारे पेड़-पौधे और फूल को पहचान सकें. पौधो के आसपास की साफ सफाई भी देखते ही बनती है. पौधों के किनारे-किनारे ड्रेन बना है. चापाकल का पानी स्वतः ड्रेन में जाकर पटवन का काम करता है. जल संरक्षण के लिए एक छोटा डोभा भी है. कुड़ा-कचरा और पत्तों से जैविक खाद का निर्माण किया जाता है. बच्चे भी स्वच्छता का खास ख्याल रखते है. 

school9sc

बच्चों के लिए विशेषः
आम धारणा बन चुकी है कि सरकारी स्कुल महज खानापूर्ति के लिए होता है. लेकिन इन बातो को तालडंगाल विद्यालय झुठलाती है. बच्चे प्रयोगशाला में भी जाते है और विज्ञान का प्रैक्टिकल भी करते हैं. पुस्तकालय में तीन दिन छात्र और तीन दिन छात्राएं विविध पुस्तकों का अध्ययन करती हैं. परिसर में महात्मा गाँधी और बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित की गयी है. विद्यालय के दीवारों में अंकित तस्वीरों और उपदेश आकर्षक व अनुकरणीय है. विद्यालय भवन के हर खंभे पर आइना लगा हुआ है. परिसर में भोजनालय शेड बना है जहां बच्चे कतारबद्ध होकर भोजन करते हैं. साइकिल स्टैंड की भी सुविधा है. बच्चों के खेलने के लिए झुलन सहित अन्य मनोरंजन की सुविधाएं हैं. पुराना शौचालय आज भी नया लगता है. विद्यालय विकास मद का यहाँ सही मायने में उपयोग होता है. 

school5

वर्गो में नही दिखती कुर्सीः
विद्यालय के कक्षाओं में कुर्सी नहीं दिखती है. यहां शिक्षक खड़े-खड़े ही बच्चों को पढ़ाते हैं. बच्चे भी अनुशासित होकर अध्ययन करते हैं. शिक्षक मिठुन नंदी और ब्रजेश नारायण ठाकुर ने बताया कि यह व्यवस्था पुर्व शिक्षक बलराम राय की देन है. उन्हीं की प्रेरणा से काफी कुछ सीखने को मिला है. 

school8kch

क्या कहते है पूर्व शिक्षकः
पूर्व शिक्षक बलराम राय ने कहा कि विद्यालय वैसा हो जो व्यवस्था को बयां करे. उन्होंने कहा कि मेरे मन में जो परिकल्पना थी वह बच्चों, शिक्षकों व अभिभावको के प्रयास से पुरा हुआ है. 

Leave a Reply

spot_img

Hot Topics

Related Articles

Don`t copy text!